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रूस से तेल खरीद पर भारत को राहत, अमेरिका नहीं लगाएगा प्रतिबंध : अशोक सज्जनहार

 

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर मंडरा रहा अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा फिलहाल टल गया है। पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने स्पष्ट किया कि 18 सितंबर को पारित एसआरआईआई (सैंक्शंस ऑन रशिया एंड ईरान एक्ट) के तहत एक महीने के भीतर कार्रवाई का प्रावधान था लेकिन वाशिंगटन ने रणनीतिक कारणों से इसे स्थगित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मार्को रुबियो की भारत यात्रा, क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक, जामनगर रिफाइनरी से जुड़ा 300 अरब डॉलर का संभावित निवेश और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव जैसे कई बड़े घटनाक्रम एक साथ जुड़ रहे हैं।

पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने कहा, "मेरे विचार से 18 सितंबर को एसआरआईआई एक्ट पास हुआ था, जिसे सैंक्शंस ऑन रशिया एंड ईरान एक्ट कहते हैं। इसके तहत जो भी देश रूस या ईरान से तेल खरीदेगा या उनके साथ अपने आर्थिक संबंधों को बढ़ाएगा, उस पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाए जाएंगे। एक महीने के अंदर इस पर कार्रवाई होनी थी लेकिन अब खबर आई है कि कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।"

उन्होंने कहा, "रूस से तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातकों में चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान और एक-दो अन्य देश शामिल हैं। आशंका थी कि इन पर कार्रवाई हो सकती है लेकिन अब यह साफ हो गया है कि चीन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी क्योंकि हाल ही में शी जिनपिंग अमेरिका गए थे और तब कहा गया था कि कम से कम दो महीने तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, इसे स्थगित किया जाएगा।"

पूर्व राजदूत ने कहा, "सबकी नजर भारत पर थी और अब भारत पर भी कहा गया है कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हम समझ रहे हैं कि अगले दो दिनों में मार्को रुबियो भारत आ रहे हैं, तो इस दौरान बातचीत होगी कि संबंधों को कैसे आगे ले जाया जाए। एक तो हिंद-प्रशांत पर चर्चा होगी और चारों विदेश मंत्री मिलेंगे। जापान के विदेश मंत्री भी आ रहे हैं और चारों विदेश मंत्री आपस में चर्चा करेंगे।"

उन्होंने कहा कि दूसरा दोनों देशों के बीच जो व्यापार समझौता और आर्थिक समझौता है, उसको लेकर बातचीत होगी कि उसे आगे कैसे बढ़ाया जाए। अब जो खबरें आई हैं, अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और हमारे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि हम द्विपक्षीय व्यापार समझौते में अंतिम पड़ाव तक पहुंच गए हैं। अब देखना होगा कि इसमें क्या होता है लेकिन मेरे विचार से इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम जामनगर का रहेगा।

पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि रिलायंस के मुकेश अंबानी करीब 300 अरब डॉलर का निवेश करने वाले हैं। वहां देखा जाए तो अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और अगर देखा जाए तो सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिनमें करीब पांच-छह सीटें ऐसी हैं जिन्हें टॉस-अप स्टेट्स कहा जाता है, यानी कुछ भी नहीं कहा जा सकता कि इसमें डेमोक्रेट जीतेगा या रिपब्लिकन जीतेगा।"

उन्होंने कहा कि टेक्सास में एक ऐसी सीट है और अगर रिलायंस कंपनी टेक्सास में बहुत अधिक निवेश करती है तो राष्ट्रपति ट्रंप अपने लोगों को बता पाएंगे कि देखिए हम भारत से कितना अधिक निवेश लेकर आए हैं। इसलिए भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता था क्योंकि वे चाहते हैं कि भारत के साथ संबंधों को इस क्षेत्र में बेहतर किया जाए।

उन्होंने कहा कि उस 300 अरब डॉलर में करीब 150 से 200 अरब डॉलर का आयात होगा क्योंकि इनकी जामनगर रिफाइनरी पूरे विश्व की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और वेनेजुएला का जो भारी और खट्टा कच्चा तेल है, वह वहां रिफाइन हो सकता है और फिर कुछ यहां से निर्यात किया जाएगा और 4 से 5 अरब डॉलर की वहां पर रिफाइनरी बनेगी।

अशोक सज्जनहार ने कहा, "इन सभी कारणों से मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह निर्णय लिया होगा कि अभी हम कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, कोई प्रतिबंध नहीं लगाते हैं और अभी बातचीत होगी। अगले दो-चार दिन में जब मार्को रुबियो यहां आते हैं तो तब देखा जाएगा कि दोनों देशों के संबंधों को आगे ले जाने में हम कैसे सक्रिय हो पाते हैं।"

--आईएएनएस

केके/पीएम