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रूस-ईरान-उत्तर कोरिया ने क्रिप्टो से बनाया नया भुगतान नेटवर्क, वीडियो में जाने प्रतिबंधों को मात देने की कोशिश, 9.92 लाख करोड़ का लेनदेन

 

दुनिया की पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से अलग एक नया वित्तीय नेटवर्क बनाने की कोशिश में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन देशों ने डिजिटल करेंसी के जरिए ऐसा समानांतर भुगतान सिस्टम तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय लेनदेन, व्यापार और प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जा रहा है।

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क्रिप्टो लेनदेन पर नजर रखने वाली संस्था चेनालिसिस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में इन देशों से जुड़े क्रिप्टो नेटवर्क पर करीब 9.92 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में करीब 8 गुना ज्यादा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कुछ देश पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के विकल्प के रूप में डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इन देशों में क्रिप्टो का उपयोग केवल निवेश या बचत तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रोन, हथियारों के पुर्जों, सैन्य तकनीक और तेल जैसे क्षेत्रों से जुड़े भुगतान के लिए भी किया जा रहा है। हालांकि, इन गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और जांच भी जारी है।

रूस ने तैयार किया रूबल आधारित डिजिटल टोकन

रूस ने अपनी मुद्रा रूबल से जुड़े एक डिजिटल टोकन ए75 (A75) को विकसित किया है। इसके जरिए रूस में रूबल देकर विदेश में क्रिप्टो के रूप में भुगतान करने की व्यवस्था तैयार करने की कोशिश की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मई तक इस नेटवर्क में करीब 11.4 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन दर्ज किए गए।

इस डिजिटल नेटवर्क में हजारों खाते जुड़े होने और बड़ी संख्या में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है। रूस का उद्देश्य पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक भुगतान रास्ते तैयार करना माना जा रहा है।

ईरान ने क्रिप्टो को बनाया वैकल्पिक भुगतान माध्यम

ईरान भी क्रिप्टोकरेंसी को विदेशी भुगतान के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों का उपयोग तेल बिक्री और अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए किया जा रहा है।

बताया जाता है कि ईरान से जुड़े कुछ संगठन डिजिटल वॉलेट के माध्यम से धन का हस्तांतरण करते हैं। इससे उन्हें पारंपरिक बैंकिंग चैनलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।

प्रतिबंधों के बीच नई वित्तीय चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टो आधारित भुगतान व्यवस्था रूस और ईरान जैसे देशों के लिए प्रतिबंधों के समानांतर चलने वाला वित्तीय रास्ता बन सकती है। डिजिटल करेंसी की विकेंद्रीकृत प्रकृति के कारण इसे नियंत्रित करना पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां क्रिप्टो के दुरुपयोग, अवैध वित्तीय गतिविधियों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इसके इस्तेमाल पर लगातार नजर रख रही हैं।

दुनिया की अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया द्वारा क्रिप्टो आधारित भुगतान नेटवर्क का विस्तार वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।