आरएसएस पर आयकर नहीं लगता, कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका: आलोक कुमार
नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण, कानूनी दर्जे और आय-व्यय की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग के बाद इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बचाव करते हुए कहा कि संघ देश के सभी कानूनों का पालन करता है और उसके पंजीकरण को लेकर उठाए जा रहे सवालों का कोई कानूनी आधार नहीं है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में आलोक कुमार ने कहा कि भारत में हर संस्था को कानून का पालन करना चाहिए और उनकी समझ के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी सभी कानूनों का पूरी तरह पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रियांक खड़गे ने संघ के पंजीकरण का मुद्दा उठाया है, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत के किस कानून के तहत संघ का पंजीकरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि संघ कानून की भाषा में 'एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स' है और इसके पंजीकरण की कोई बाध्यता या अनिवार्यता किसी भी कानून में नहीं है।
संघ की आय और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि इस विषय पर न्यायालय पहले ही अपना फैसला दे चुका है। उन्होंने बताया कि संघ में वर्ष में एक बार गुरुदक्षिणा का आयोजन होता है और उसी के माध्यम से प्राप्त होने वाला स्वयंसेवकों का योगदान संगठन की आय का स्रोत होता है। उन्होंने कहा कि संघ बाहरी लोगों से पैसा नहीं लेता; यह केवल स्वयंसेवकों के योगदान से चलता है। वर्ष 1967-68 और 1975-76 में आयकर विभाग के अधिकारियों ने यह माना था कि संघ की आय टैक्स योग्य है। इसके खिलाफ संघ ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि संघ की आय केवल स्वयंसेवकों के योगदान से होती है और 'म्युचुअलिटी' के सिद्धांत के कारण उस पर आयकर लागू नहीं होगा।
आलोक कुमार ने आगे कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल के दौरान भी इस विषय पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के निर्णय के बाद सीडीवीटी ने भी आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि स्वयंसेवकों द्वारा दी जाने वाली गुरुदक्षिणा, म्युचुअलिटी के आधार पर, आयकर के दायरे से बाहर है।
प्रियंक खड़गे की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि प्रियांक खड़गे को सस्ती राजनीति करने से पहले तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए थी।
बता दें कि प्रियंक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संघ के पंजीकरण, उसके कानूनी स्वरूप और आय-व्यय से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
--आईएएनएस
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