पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों में सरकारों के खिलाफ गुस्सा, एनएसयूआई जीतेगी चुनाव: विनोद जाखड़
चंडीगढ़, 18 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब यूनिवर्सिटी में एनएसयूआई के चुनावी प्रचार के दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मंगलवार को केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार पर बड़ा हमला बोला। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ पीयू पहुंचे जाखड़ ने कहा कि छात्रों में सरकारों के खिलाफ गुस्सा है और आरोप लगाया कि आरएसएस ने पूरे विश्वविद्यालय को अपने कब्जे में ले लिया है।
उन्होंने प्रोफेसरों की नियुक्ति, सुरक्षा, साफ-सफाई और पेपर लीक जैसे मुद्दे गिनाते हुए कहा कि वॉशरूम और सुरक्षा की कमी से छात्राएं परेशान हैं। जाखड़ ने दावा किया कि दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का गुस्सा भी पीयू के छात्रों में है और यही गुस्सा इस बार एनएसयूआई को जीत दिलाएगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिस तरह युवाओं के साथ खड़े हैं, उसकी शुरुआत पंजाब यूनिवर्सिटी से होगी।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा, "हमारे नेता दीपेंद्र हुड्डा, कर्मवीर सिंह बौद्ध, अविनाश यादव समेत तमाम नेता छात्रों से बात कर रहे हैं। इससे एक ही बात दिमाग में आती है कि छात्रों में केंद्र सरकार और पंजाब और हरियाणा सरकार के प्रति गुस्सा है। साफ शब्दों में बोलूं तो आरआरएस ने पूरे विश्वविद्यालय को कब्जे में ले लिया है। विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल नहीं रहा। बिना किसी विषय के ज्ञान के प्रोफेसर भरे जा रहे हैं। ये समझ में आ रहा है कि जो भी संघ की क्लास चलाता है, उसे प्रोफेसर बनाया जा रहा है।"
विनोद जाखड़ ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी की अमिट पहचान रही है। कल्पना चावला जैसे बड़े नाम और बड़े नेता इस विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले हैं। इन्होंने न केवल प्रदेश में बल्कि देश में भी नाम रोशन किया है। यहां खाने-पीने, साफ-सफाई की सुविधा नहीं है। छात्राओं की शिकायत है कि वॉशरूम और सुरक्षा की कोई सुविधा नहीं है। एक बहन की करंट लगने से मौत हो जाती है, तो विश्वविद्यालय की लापरवाही सामने आती है। ट्रांसपेरेंट परीक्षा और पेपर लीक को लेकर जो छात्रों में गुस्सा था, उसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार के प्रति छात्रों ने गुस्सा जाहिर किया। दिल्ली में भाजपा ने जिस तरह से छात्रों पर लाठीचार्ज कराया, उसका गुस्सा पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों में भी है। यह गुस्सा इस बार के चुनाव में एनएसयूआई को जीत दिलाएगा।"
"जिस प्रकार से राहुल गांधी ने पूरे देश में न केवल वहां, जहां कांग्रेस गठबंधन की सरकार थी, बल्कि झारखंड में भी वह छात्रों के साथ खड़ रहे और उनका साथ दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से राहुल गांधी ने फोन पर बात की और लेटर भी लिखा। इससे ये समझ आता है कि इस देश का युवा राहुल गांधी के साथ है। इसकी शुरुआत पंजाब यूनिवर्सिटी से करने वाले हैं। इससे एक बड़े बदलाव की शुरुआत होने जा रही है।"
वंदे मातरम गीत को लेकर जारी विवाद पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत ही नहीं है। ये आजादी के आंदोलन का स्वर था। बंकिम चंद्र उपाध्याय की कलम से अंकित वंदे मातरम जब 1896 के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में रविंद्र नाथ टैगोर ने गाया, उसके बाद ये हमारे आजादी के आंदोलन और देश का गीत बना। मुझे गर्व है कि मैं उस दल से हूं, जिसने 1896 से लेकर आज तक हर कार्यक्रम में इस गीत को गाया है। जब पंडित जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुने गए और 1937 के सत्र में अपना अध्यक्षीय भाषण का समापन उन्होंने स्वयं वंदे मातरम गीत गाकर किया। उसी समय अधिवेशन में ये प्रस्ताव पारित हुआ कि वंदे मातरम को राष्ट्र गीत के रूप में गाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "ये वो गीत है, जिसे देश भक्त गाते थे और तिरंगा लहराने का काम करते थे। उस समय भाजपा से जुड़ा आरएसएस का संगठन न तो तिरंगा लहराता था और न ही कभी वंदे मातरम का गीत गाया। मेरे दादा चौधरी रणवीर सिंह को वंदे मातरम गीत गाने पर चार साल की सजा हुई थी। चार साल उन्होंने लाहौर सेंट्रल जेल में बिताए। मैं भाजपा को सलाह देना चाहता हूं कि वो देशभक्ति की नीयत से वंदे मातरम गाने का काम करे, वंदे वोटरम के भाव से नहीं।"
--आईएएनएस
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