आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर वैश्विक संपर्क अभियान, संघ प्रमुख मोहन भागवत आज से तीन देशों के दौरे पर होंगे रवाना
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार से तीन देशों के प्रवास पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। इस दौरान भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा करेंगे।
संघ सूत्रों के अनुसार, इस प्रवास के दौरान उनका जोर प्रवासी भारतीयों, छात्रों और बौद्धिक वर्ग से संवाद पर रहेगा। अमेरिका में 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में 'एकात्मता उत्सव' का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम का नाम 'यूनिवर्सल वननेस' भी बताया जा रहा है। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत मुख्य रूप से संबोधित करेंगे। इस उत्सव में हजारों प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है।
आरएसएस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय से जुड़े संगठनों की भागीदारी वाला एक बड़ा सामुदायिक कार्यक्रम होगा।
अमेरिका के बाद संघ प्रमुख 31 अगस्त और 1 सितंबर को कनाडा के टोरंटो में रहेंगे। यहां वे प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक करेंगे और मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे।
संघ सूत्रों का मानना है कि लंबे समय के बाद किसी आरएसएस प्रमुख का कनाडा दौरा हो रहा है, जो ऐतिहासिक है। हालांकि, भागवत के दौरे से पहले ही कनाडा में खालिस्तानी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें हैं।
इसे देखते हुए कनाडा में संघ प्रमुख के कार्यक्रम और प्रवास को लेकर सरकार ने उच्च सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। मिलने आने वाले लोगों का पहले से बैकग्राउंड चेक किया जाएगा, उसके बाद ही उन्हें मिलने की अनुमति दी जाएगी।
उत्तरी अमेरिका के बाद ब्रिटेन जाने की भी संभावना जताई जा रही है। अमेरिका और कनाडा के बाद भागवत ब्रिटेन जाएंगे, जहां लंदन में कम्युनिटी और लीडरशिप कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
यहां भी भारतीय मूल के लोगों, हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करना यात्रा का अहम हिस्सा रहेगा।
संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंदा के अनुसार, इस वैश्विक यात्रा के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, भारत, हिंदू समाज और आरएसएस के बारे में सकारात्मक और तथ्यात्मक दृष्टिकोण रखना।
दूसरा, भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की परंपरा का संदेश दुनिया तक पहुंचाना। तीसरा, विदेशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों और अधिकारों से जुड़े विषयों पर मुख्यधारा के समाज के साथ संवाद बढ़ाना।
--आईएएनएस
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