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आरएसएस के कार्यक्रम को लेकर जोहरान ममदानी के बयान पर भड़के नेता, बोले-उनकी सोच विकृत और पक्षपाती

 

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मैडिसन स्क्वायर में होने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के विरोध में न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी की ओर से दिए गए बयान पर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।

महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष अमित सटाम ने 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "हमें किसी ऐसे व्यक्ति से "अलग-थलग करने वाली सोच" पर सीख लेने की जरूरत नहीं है, जो अति-वामपंथी, कट्टरपंथी और अलगाववादी हो, और जो देश-विरोधी उमर खालिद के प्रति सहानुभूति रखता हो।"

अमित साटम ने लिखा, "आपको उस संस्था को समझने में बहुत समय लगेगा जो बिना किसी जाति, पंथ, धर्म या लिंग के भेदभाव के खासकर संकट और आपदा के समय इंसानियत को बेहतर बनाने, राष्ट्र-निर्माण और मानवता की सेवा करने का काम करती है। असल में विविधता का सम्मान यही है जबकि विविधता के बारे में आपकी सोच विकृत और पक्षपाती है और यह किसी खास समूह या कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुकी हुई है!"

आरएसएस के कार्यक्रम पर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणी पर शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने आईएएनएस से कहा, "यह सौ साल पुराना सांस्कृतिक संगठन है जो अपनी शाखाओं में लोगों को एके-47 नहीं बल्कि लाठी चलाना सिखाता है। सवाल यह है कि जोहरान ममदानी इतने परेशान क्यों हैं? अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 200 से ज्यादा सेवा प्रोजेक्ट चल रहे हैं, चाहे वह तूफान का समय हो या कोविड का।"

शाइना एनसी ने कहा, "एफबीआई ने कभी भी आरएसएस को चरमपंथी संगठन नहीं कहा है, बल्कि इसकी तारीफ ही की गई है। ममदानी ने ही 'हिंदू नफरत रोको' या 'हिंदू नफरत शुरू करो' वाली बहस शुरू की। यह समझिए कि यह आपका अमेरिका है, जहां आप खालिस्तानियों को विरोध-प्रदर्शन करने देते हैं, जहां आप हमास का समर्थन करते हैं। "

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने आईएएनएस से कहा, "देखिए, हो सकता है कि उन्होंने (ममदानी) यह बयान अपनी स्थानीय राजनीति के लिए दिया हो। वरना, आरएसएस दुनिया के सबसे अनुशासित संगठनों में से एक है, जो लाखों लोगों की सेहत और भलाई के लिए काम कर रहा है। बिना लालच के देश के लिए काम करने का जज्बा पैदा करता है।"

भाजपा नेता नलिन कोहली ने आईएएनएस से कहा, "मैंने मीडिया में ममदानी की बात सुनी। एक तरफ तो वे बहुलवाद की बात करते हैं और इसे लेकर बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे कह रहे हैं कि मोहन भागवत की रैली नहीं होनी चाहिए और उसका विरोध कर रहे हैं। अगर वे बहुलवाद की बात करते हैं, तो उन्हें मोहन भागवत की रैली करने से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। आप बहुलवाद की बात करते हुए ऐसा रुख नहीं अपना सकते जो पूरी तरह से उसके उलट हो।"

--आईएएनएस

एसडी/पीएम