आरएसएस अब हर तीन साल में एक बार 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' आयोजित करेगा
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी संगठनात्मक कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इसके तहत, संगठन की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' (एबीपीएस) अब प्रत्येक वर्ष के बजाय हर तीन साल में एक बार आयोजित की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत आरएसएस हर तीन साल में एक बार नागपुर में केंद्रीय एबीपीएस बैठक बुलाएगा, जबकि आरएसएस के सभी नौ क्षेत्रों में हर साल क्षेत्रीय प्रतिनिधि बैठकें आयोजित की जाएंगी। सूत्रों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य संगठन की कार्यप्रणाली का विकेंद्रीकरण करना और जमीनी स्तर पर काम में तेजी लाना है।
अपनी स्थापना के बाद से आरएसएस पारंपरिक रूप से हर साल मार्च में एबीपीएस बैठक आयोजित करता आ रहा है। यह बैठक विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा करने, नीतिगत मामलों पर चर्चा करने, प्रस्ताव पारित करने और आने वाले समय के लिए संगठन की प्राथमिकताएं तय करने का एक प्रमुख मंच रही है।
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत नागपुर में होने वाली केंद्रीय बैठक मुख्य रूप से बड़े नीतिगत फैसलों पर केंद्रित होगी। यह बैठक उन वर्षों में आयोजित की जाएगी, जब सरकार्यवाह (महासचिव) का चुनाव होना होता है।
यह निर्णय आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव है, जिसमें क्षेत्रीय स्तर पर विचार-विमर्श और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर अधिक जोर दिया गया है। उम्मीद है कि हर साल होने वाली क्षेत्रीय प्रतिनिधि बैठकें, संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा करने और स्थानीय प्राथमिकताओं पर ध्यान देने के लिए एक नियमित मंच प्रदान करेंगी।
एबीपीएस पारंपरिक रूप से आरएसएस के कैलेंडर में सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक रहा है। इसमें संगठन के विभिन्न हिस्सों से प्रतिनिधि इकट्ठा होते हैं, जो संगठन के कामकाज का आकलन करते हैं और भविष्य की दिशा पर चर्चा करते हैं। इस बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव पर भी चर्चा हो सकती है।
इस पुनर्गठन से एबीपीएस और आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारी संस्था, 'अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल' (एबीकेएम) के बीच के अंतर पर भी नया ध्यान गया है। एबीकेएम की बैठक आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में होती है, जिसमें पदाधिकारियों का एक सीमित समूह शामिल होता है। यह संगठन के भीतर विचार-विमर्श और निर्णय लेने के लिए एक मंच का काम करता है।
पर्यवेक्षकों और टिप्पणीकारों ने अक्सर आरएसएस की संगठनात्मक बैठकों को मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ इसके संबंधों के नजरिए से देखा है। हालांकि, एबीपीएस की संरचना और कार्यप्रणाली ने आरएसएस की आंतरिक संगठनात्मक प्रक्रियाओं और उसकी व्यापक प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वार्षिक राष्ट्रीय प्रतिनिधि बैठक को तीन साल के चक्र में बदलने का प्रस्ताव और साथ ही नौ क्षेत्रों में वार्षिक बैठकें आयोजित करने का कदम, विकेंद्रीकृत कामकाज को मजबूत करने और संगठन के जमीनी स्तर के नेटवर्क के साथ जुड़ाव को और गहरा करने के प्रयास का संकेत देता है।
--आईएएनएस
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