देश में बढ़ी बेरोजगारी ने बढ़ाई चिंता, मार्च महीने के आंकड़े देख फटी रह जाएंगी आँखें
दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के बीच, भारत के लिए एक और बुरी खबर सामने आ रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी 'पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे' (PLFS) में एक ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसने चिंताओं को और बढ़ा दिया है। सर्वे के मुताबिक, 15 से 29 साल के लोगों में बेरोज़गारी दर मार्च में बढ़कर 15.2 प्रतिशत हो गई—जो फरवरी में 14.8 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले नौ महीनों में दर्ज किया गया सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले, जून 2025 में युवाओं में बेरोज़गारी दर 15.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट क्या कहती है?
आंकड़ों के लिहाज़ से, 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में कुल बेरोज़गारी दर मार्च में बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई। फरवरी में यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत था। मंत्रालय के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण शहरी इलाकों में रोज़गार के अवसरों में आई कमी है।
शहरों में बढ़ती बेरोज़गारी
युवाओं पर खास तौर पर ध्यान दें तो, 15-29 साल के पुरुषों में बेरोज़गारी दर मार्च में बढ़कर 14.3 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 13.7 प्रतिशत थी। वहीं, इसी उम्र की महिलाओं में यह दर बढ़कर 17.7 प्रतिशत हो गई, जबकि पहले यह 17.6 प्रतिशत थी। ग्रामीण इलाकों में युवाओं में बेरोज़गारी दर 13.6 प्रतिशत रही, जबकि शहरी इलाकों में यह बढ़कर 18.4 प्रतिशत हो गई। ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि गांवों के मुकाबले शहरों में बेरोज़गारी दर ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है।
श्रम बल भागीदारी में गिरावट
मार्च के महीने में 'श्रम बल भागीदारी दर' (LFPR) में भी गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा गिरकर 55.4 प्रतिशत पर आ गया, जो फरवरी में 55.9 प्रतिशत था। ग्रामीण इलाकों में भी गिरावट का रुख देखा गया; यह दर, जो पहले 58.7 प्रतिशत थी, अब 58 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। महिलाओं में भी भागीदारी दर में गिरावट देखी गई, जो अपने पिछले स्तर 35.3 प्रतिशत से गिरकर 34.4 प्रतिशत पर आ गई। इस बीच, पुरुषों के लिए भागीदारी दर 77.4 प्रतिशत रही—जो फरवरी में दर्ज 77.5 प्रतिशत से थोड़ी कम है।