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रिश्वतखोरी के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व मैनेजर को 4 साल की कैद, 30 हजार रुपए जुर्माना भी लगा

 

लखनऊ/नई दिल्‍ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने रिश्वतखोरी के एक मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व शाखा प्रबंधक सुबोध कुमार रस्तोगी को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कारावास और 30 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

सीबीआई द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, लखनऊ स्थित सीबीआई अदालत ने 2 नवंबर को फैसला सुनाते हुए सुबोध कुमार रस्तोगी को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया। घटना के समय वह उत्तर प्रदेश के बलरामपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में प्रबंधक के पद पर तैनात थे।

मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर 2015 को दर्ज हुई शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसने अपने सोलर लाइट कारोबार के विस्तार के लिए बैंक से पांच लाख रुपए का ऋण लिया था।

आरोप है कि ऋण की 1.25 लाख रुपए की टर्म लोन राशि जारी करते समय शाखा प्रबंधक ने सीए शुल्क, स्टांप पेपर और फाइल शुल्क के नाम पर करीब 25 हजार रुपए वसूल लिए।

शिकायत में यह भी कहा गया कि बाद में 3.75 लाख रुपए की कैश क्रेडिट लिमिट जारी करते समय आरोपी ने खाता बंद करने की धमकी देकर 25 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 18 दिसंबर 2015 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए चार साल की सजा और 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

सीबीआई ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ एजेंसी की कार्रवाई लगातार जारी है और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम