राष्ट्रीय डाक दिवस 2026: कब हुई थी दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क की शुरुआत, जानें इसका इतिहास
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय डाक दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है, जो देश के कोने-कोने तक अपनी सेवाएं पहुंचाता है। इंडिया पोस्ट कम लागत में देश के सबसे दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक भी अपनी पहुंच बनाती है, इसलिए यह समाज और देश के संचार, वित्तीय और सामाजिक विकास की रीढ़ है।
डाक सेवा के महत्व को समझते हुए, इसके बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस मनाया जाता है। यह दिन 9 अक्टूबर को मनाए जाने वाले 'विश्व डाक दिवस' के ठीक बाद आता है। इसका उद्देश्य डाक विभाग के योगदान और इतिहास के साथ देश को जोड़ने में उसकी 150 से अधिक वर्षों की भूमिका के सम्मान में मनाया जाता है।
भारत में पहली बार डाक व्यवस्था की शुरुआत ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1766 में 'कंपनी मेल' के रूप में नींव रखने से की गई थी। इसके बाद मार्च 1774 में बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में पहला डाकघर स्थापित किया और इसे आम जनता के लिए खोला, जिसका नाम जनरल पोस्ट ऑफिस (जीपीओ) रखा गया।
फिर ब्रिटिश सरकार के गवर्नर लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में 1 अक्टूबर 1854 को 'इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट' पारित हुआ, जिसके तहत पूरे देश के डाकघरों को मिलाकर एक केंद्रीय विभाग के रूप में स्थापना की गई, जिसका नाम भारतीय डाक रखा गया। वहीं, भारत में 6 अंकों की पिन (डाक सूचकांक संख्या) कोड प्रणाली की शुरुआत 15 अगस्त 1972 को हुई थी।
देश में हर वर्ष विश्व डाक दिवस 9 अक्टूबर से मनाया जाता है। वर्ष विश्व डाक के दिन से ही यानी 9 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच 'राष्ट्रीय डाक सप्ताह' मनाया जाता है, जिसके तहत अलग-अलग दिन विभिन्न डाक एवं वित्तीय सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम होते हैं।
बता दें कि भारत 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' का सदस्य 1 जुलाई 1876 को बना था। वर्तमान समय में देशभर में 1,64,999 डाकघर कार्यरत हैं। इनमें शहरी डाकघर की संख्या 15,614 और ग्रामीण डाकघर 1,49,385 हैं। वहीं, मुख्य डाकघर 810, उप-डाकघर 24,281 और शाखा डाकघर 13,990 हैं। वहीं, औसतन एक डाकघर देश में 7,339 लोगों को सेवा प्रदान करता है। वहीं, डाकघर द्वारा सेवा प्रदान किया जाने वाला औसत क्षेत्र 19.92 वर्ग किलोमीटर है।
--आईएएनएस
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