राष्ट्रपति के स्नेह से यादगार बनी झारखंड की कलावती और दिलीप की दीपावली, नौ साल पुराना रिश्ता फिर हुआ जीवंत
रांची, 3 नवंबर (आईएएनएस)। रिश्ते कभी-कभी एक छोटी-सी पहल से जन्म लेते हैं। वक्त गुजरता है, परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन रिश्तों की गर्माहट बनी रहती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा की कलावती मुंडा तथा उनके बेटे दिलीप मुंडा के बीच नौ साल पहले बना रिश्ता इसकी मिसाल है।
इस बार दीपावली से पहले राष्ट्रपति के विशेष आमंत्रण पर मां-बेटे को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचने और उनसे मुलाकात करने का अवसर मिला। उनके लिए यह दीपावली एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई। गुड़ाबांदा के प्रखंड विकास पदाधिकारी डांगुर कोड़ाह मां-बेटे को लेकर दिल्ली पहुंचे। राष्ट्रपति भवन में उनका आत्मीय स्वागत किया गया। उन्हें परिसर का भ्रमण कराया गया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनसे मुलाकात कर हालचाल पूछा।
इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन की ओर से दोनों को दीपावली के उपहार के रूप में कपड़े और आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके बाद सरकारी वाहन से उन्हें दिल्ली के प्रमुख स्थानों का भ्रमण भी कराया गया। कलावती और उनके बेटे के साथ राष्ट्रपति का यह जुड़ाव करीब नौ साल पुराना है। वर्ष 2017 में द्रौपदी मुर्मु झारखंड की राज्यपाल थीं। उस समय कलावती बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रही थीं। वह बोलने और सुनने में असमर्थ हैं। एक गंभीर हिंसा की घटना ने उनकी जिंदगी को और मुश्किल बना दिया था। आर्थिक तंगी के बीच बेटे की परवरिश भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
उनकी पीड़ा जब तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु तक पहुंची तो उन्होंने मां-बेटे को राजभवन बुलाया। उन्होंने दिलीप की परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई। इस पहल ने एक मां को सहारा दिया और बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाई। द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति बनने के बाद भी कलावती और दिलीप के साथ उनका जुड़ाव बना हुआ है। राष्ट्रपति भवन से मिला इस बार का आमंत्रण इसी रिश्ते की एक नई कड़ी है।
एक छोटे से गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के आवास तक पहुंचना मां-बेटे के लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहा। उनके लिए दीपावली का सबसे बड़ा उपहार कपड़े और आर्थिक सहायता से बढ़कर वह अपनापन था, जिसने नौ साल बाद भी उन्हें याद रखा।
--आईएएनएस
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