राष्ट्र के प्रतीकों का अपमान न करें, नक्सलवाद का दर्द बस्तर जाकर समझें: विजय शर्मा
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस और विपक्ष से जुड़े कई राजनीतिक मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बस्तर में इस बार हुए भव्य तिरंगा यात्रा कार्यक्रम, वंदे मातरम को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोप, कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद के आरएसएस को लेकर दिए बयान और भाजपा के नए संगठनात्मक नियुक्तियों पर अपनी राय रखी।
बस्तर में तिरंगा यात्रा के भव्य आयोजन को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि एक समय ऐसा था जब बस्तर में तिरंगा फहराने पर भी हत्याएं हुआ करती थीं। कई गांवों में संविधान का पूर्ण रूप से पालन नहीं होता था। केंद्र और राज्य सरकारों ने दृढ़ संकल्प के साथ बस्तर के कोने-कोने तक संविधान लागू करने की दिशा में काम किया है। इस बार 15 अगस्त को बस्तर में सभी स्थानों और संस्थानों में तिरंगा फहराया गया। बस्तर तिरंगा यात्रा का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं था, बल्कि लोगों तक यह संदेश पहुंचाना था कि अब किसी को तिरंगा फहराने से रोका नहीं जा सकता। लोगों से हर घर में तिरंगा फहराने की अपील की गई और यात्रा के दौरान लोगों को तिरंगे भी वितरित किए गए। 'हर घर तिरंगा' और 'घर-घर तिरंगा' का संदेश बस्तर के हर हिस्से तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
वंदे मातरम को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर विजय शर्मा ने कहा कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस के एक नेता का बयान मैंने सुना, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि बड़े नेताओं की ओर से मना किए जाने के बावजूद उन्होंने पूरा वंदे मातरम गाया। शर्मा ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इसे लेकर आपत्ति जताई जा रही थी। किसी व्यक्ति की रुचि या अरुचि अलग विषय हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के विषयों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। बड़े संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
कांग्रेस पर भाजपा के विरोध में भारत के प्रतीकों और परंपराओं का विरोध करने का आरोप लगाते हुए विजय शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी राजनीतिक दल और उसकी विचारधारा का विरोध किया जा सकता है, लेकिन उन मुद्दों का विरोध नहीं किया जाना चाहिए जो देश की जनता की भावनाओं से जुड़े हैं।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की 'दिमागी नक्सल' संबंधी टिप्पणी के संदर्भ में विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाकर यह बात नहीं कही थी। पीएम मोदी नक्सलवाद के कारण हुए नुकसान को अच्छी तरह जानते हैं और बस्तर में नक्सल हिंसा के कारण हुई मौतों तथा तबाही से परिचित हैं। नक्सलवाद के कारण बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों ने जान गंवाई है और आदिवासी समुदाय के लोगों को भी हिंसा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की हत्या, तिरंगा फहराने वालों को निशाना बनाए जाने और झीरम घाटी जैसी घटना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि झीरम की घटना में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की जान चली गई थी। नक्सलवाद का मतलब केवल एक राजनीतिक शब्द नहीं है, बल्कि वह हिंसा है जो लोगों की जिंदगी बर्बाद करती है और देश को अस्थिर करने की कोशिश करती है। उन्होंने विपक्ष पर 'वोट बैंक की राजनीति' के लिए प्रधानमंत्री मोदी के बयान को अलग तरीके से पेश करने का आरोप लगाया।
विजय शर्मा ने कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे को अपने ऊपर लेना चाहता है तो यह अलग बात है, लेकिन नेताओं को पहले यह समझना चाहिए कि नक्सलवाद का वास्तविक अर्थ और उसका दर्द क्या है। उन्होंने सलाह दी कि विपक्षी नेताओं को बस्तर जाकर उन लोगों से मिलना चाहिए जिन्होंने नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवाए हैं। उनके मुताबिक, अगर नेता पीड़ितों का दर्द नहीं समझेंगे तो जनता समय आने पर उन्हें इसका जवाब देगी।
कांग्रेस नेता हरिप्रसाद द्वारा आरएसएस को लेकर दिए गए बयान पर विजय शर्मा ने सवाल उठाया कि किसी संगठन के सामाजिक और सांस्कृतिक काम के लिए किस तरह के पंजीकरण की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो संगठन काम करता है, उसके पंजीकरण का सवाल हो सकता है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तथा लोगों के आपस में मिलने-जुलने को किस तरह पंजीकरण से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मूल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश करती है। उन्होंने भारत के विभाजन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गठन, जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर भी चिंता की जानी चाहिए। राजनीतिक दलों को भारत की मूल समस्याओं और देश की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भाजपा के नए संगठनात्मक नियुक्तियों पर विजय शर्मा ने कहा कि नई टीम में अनुभव और नए अवसरों का अच्छा संतुलन दिखाई देता है। नई टीम बनाई गई है, लेकिन पुराने अनुभव को पूरी तरह अलग नहीं किया गया है। नितिन नवीन के साथ काम करने का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वह नितिन नवीन की कार्यशैली और संगठन चलाने की क्षमता को जानते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा की नई संगठनात्मक टीम आने वाले समय में पार्टी के लिए बेहतर काम करेगी और संगठन के स्तर पर महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
--आईएएनएस
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