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रणथंभौर टाइगर रिजर्व: जंगल, किला और बाघों की दुनिया, दो मिनट के वीडियो में जानिए राजस्थान के इस अनोखे अभयारण्य की कहानी

 

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के सबसे चर्चित वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। यहां अरावली और विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच फैला जंगल, झीलें, पहाड़ियां और ऐतिहासिक रणथंभौर किला मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं, जो इसे दूसरे जंगलों से अलग पहचान देता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार यह क्षेत्र सवाई माधोपुर से करीब 14 किलोमीटर दूर है और बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए जाना जाता है।

बाघों के लिए खास है रणथंभौर

रणथंभौर की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद रॉयल बंगाल टाइगर हैं। जंगल में बाघों के अलावा तेंदुआ, स्लॉथ भालू, लकड़बग्घा, सियार, लोमड़ी, नीलगाय, सांभर, चीतल और लंगूर जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं। मगरमच्छ और बड़ी संख्या में पक्षी भी यहां के पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।

रणथंभौर का सूखा पर्णपाती जंगल, चट्टानी पहाड़ियां और पानी के स्रोत वन्यजीवों के लिए अलग-अलग तरह के आवास उपलब्ध कराते हैं। इसी प्राकृतिक विविधता के कारण यहां सफारी के दौरान कई तरह के जानवर दिखाई दे सकते हैं।

1530 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा में फैला टाइगर रिजर्व

राजस्थान वन विभाग के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 1,530.23 वर्ग किलोमीटर है। इसका विस्तार सवाई माधोपुर के साथ करौली, बूंदी और टोंक जिलों तक दर्ज है। वहीं रणथंभौर नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 282.03 वर्ग किलोमीटर है।

टाइगर रिजर्व में कोर और बफर क्षेत्र शामिल हैं। राजस्थान सरकार के टाइगर कंजर्वेशन प्लान में रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और बफर क्षेत्र का अलग-अलग विवरण दिया गया है।

जंगल के बीच ऐतिहासिक रणथंभौर किला

रणथंभौर की खासियत सिर्फ वन्यजीव नहीं हैं। जंगल के बीच पहाड़ी पर स्थित रणथंभौर किला इस पूरे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार किले का निर्माण चौहान शासकों के समय 10वीं शताब्दी में हुआ था। विशाल दीवारें, दरवाजे, मंदिर और जल संरचनाएं आज भी इसके पुराने वैभव की कहानी बताते हैं।

किले की ऊंचाई से आसपास का जंगल और जलाशय दिखाई देता है। यही वजह है कि रणथंभौर में इतिहास और वन्यजीव पर्यटन का अनोखा मेल देखने को मिलता है।

सफारी में दिखता है जंगल का असली रूप

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रणथंभौर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए जंगल सफारी प्रमुख आकर्षण है। जीप और कैंटर सफारी के दौरान पर्यटक जंगल के अलग-अलग हिस्सों में वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखने की कोशिश करते हैं।

हालांकि किसी सफारी में बाघ दिखाई देगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। वन्यजीव अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार जंगल में घूमते हैं। राजस्थान वन विभाग रणथंभौर के लिए ऑनलाइन सफारी और परमिट की सुविधा उपलब्ध कराता है।

कभी जयपुर राजघराने का शिकार क्षेत्र था

राजस्थान पर्यटन के अनुसार रणथंभौर कभी जयपुर के राजघराने का निजी गेम रिजर्व रहा था। बाद में यहां वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता मिली और यह क्षेत्र टाइगर संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ।

आज रणथंभौर की पहचान शिकार के पुराने इतिहास से ज्यादा बाघ संरक्षण और वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी है। जंगल की प्राकृतिक खूबसूरती, ऐतिहासिक किला और बाघों की मौजूदगी इसे राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करती है।

प्रकृति और इतिहास का अनोखा संगम

रणथंभौर टाइगर रिजर्व ऐसा स्थान है जहां एक ही यात्रा में जंगल, वन्यजीव, झीलें, पहाड़ और सदियों पुराना किला देखने को मिलता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। राजस्थान में वन्यजीव पर्यटन की बात होती है तो रणथंभौर का नाम सबसे पहले आने वाले प्रमुख स्थलों में शामिल रहता है।