रंगभरी एकादशी के साथ अवध में होली की शुरुआत, मंदिर और मठों को दिया जा रहा न्योता
अयोध्या, 27 फरवरी (आईएएनएस)। अवध में हनुमान जी के प्रतिनिधित्व चिह्न को लेकर साधुओं की शोभायात्रा के साथ होली की शुरुआत कर दी गई है।
इस मौके पर अयोध्या में अलग ही खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। मंदिर में रंगभरी एकादशी के मौके पर भक्त राम मंदिर और हनुमानगढ़ी मंदिर में भारी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, और अयोध्या में 7,000 से अधिक मंदिरों में आरती और गुलाल के साथ होली मनाई गई, जिसका उत्साह भक्तों से लेकर साधु-संतों के चेहरे पर साफ देखा जा रहा है।
सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशचार्य महाराज के मुताबिक, परंपरा का निर्वाहन काफी समय से किया जा रहा है। उन्होंने आईएएनएस को बताया कि "यह सदियों पुरानी परंपरा है। अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में हनुमान जी का प्रतिनिधित्व स्वरूप निशान है, जिसकी पूजा होती है। साधु और महंत मिलकर मंदिर में अनुष्ठान करते हैं तथा अयोध्या के पंचकोशी की परिक्रमा होती है। इसके साथ अयोध्या के सभी मंदिर और मठों में होली खेलने का न्योता दिया जाता है। यह परंपरा अवध में होली की शुरुआत का प्रतीक है और भगवान हनुमान यहां के राजा हैं, इसलिए शुरुआत हनुमान मंदिर से होती है और बाद में सभी मंदिरों में न्योता दिया जाता है।
वहीं हनुमानगढ़ी मंदिर के ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी स्वामी संजय दास ने उत्सव के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि रंगभरी एकादशी के साथ फाल्गुन की शुरुआत हो चुकी है। हम प्रतिनिधित्व स्वरूप निशान की पूजा करने के बाद हर साल की तरह संगीत, ढोल-नगाड़ों और नाग साधुओं के साथ पंचकोसी परिक्रमा पर निकले हैं। यह शुभ दिन होली के आगमन का दिन है और सभी मंदिरों में फाग का न्योता दिया जा रहा है।
बता दें कि रंगभरी एकादशी के दिन हनुमानगढ़ी मंदिर में विशेष आयोजन होता है, जहां साधु-संत और नागा साधु मिलकर हनुमान जी के प्रतिनिधित्व स्वरूप निशान को साथ लेकर यात्रा पर निकलते हैं और पंचकोसी की परिक्रमा को पूरा करते हैं। खास बात यह भी है कि सिर्फ हनुमान गढ़ी में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में रंगभरी एकादशी के दिन हर मंदिर में गुलाल अर्पित कर भगवान के साथ होली खेली जाती है। मथुरा और वृंदावन में रंगभरी एकादशी पर बांके बिहारी मंदिर में खास आयोजन होते हैं।
--आईएएनएस
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