राम मंदिर मामले की एसआईटी जांच पर सुप्रिया श्रीनेत का तंज, कहा-छोटे लोगों पर गाज, बड़े लोगों को बचाने की तैयारी
नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर ट्रस्ट और कथित चढ़ावा व वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। साथ ही इस मुद्दे को संसद में उठाने के संकेत भी दिए हैं।
नागपुर में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने राम मंदिर मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे कोई ठोस नतीजा निकलने की संभावना नहीं है। उनका आरोप था कि एसआईटी में वही लोग शामिल हैं जो उस व्यवस्था का हिस्सा हैं, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जांच दल जल्दबाजी में गठित किया गया ताकि छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हो सके और बड़े लोगों को बच निकलने का अवसर मिल जाए। एसआईटी की जांच से सच सामने आने की उम्मीद नहीं है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार होने तथा उन्हें क्लीन चिट दिए जाने की जानकारी दी।
श्रीनेत ने सवाल उठाया कि दोनों को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका रही है और ट्रस्ट अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। उन्होंने ट्रस्ट को भंग करने की मांग भी की।
पंजाब कांग्रेस में कथित गुटबाज़ी के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक दलों में मतभेद स्वाभाविक होते हैं और इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए।
उधर, समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को संसद में उठाने की पूरी संभावना है। जनता से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे को सदन में उठाया जाता है और पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में इस विषय पर भी चर्चा की जाएगी।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने ट्रस्ट पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के बयान से इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनके अनुसार यदि कोषाध्यक्ष स्वयं वित्तीय निर्णयों से अलग रहने की बात कहते हैं, तो यह अत्यंत चिंताजनक है।
--आईएएनएस
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