×

राम मंदिर के दानपात्र में करते हैं घपलेबाजी और हमें पढ़ाते हैं मूल्यों का पाठ: अधीर रंजन चौधरी

 

मुर्शिदाबाद, 16 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने राम मंदिर दानपात्र के घपलेबाजी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। ऐसी घटनाओं को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के श्रद्धालुओं ने अपने कदम आगे बढ़ाए थे। सभी ने खुल दिल से राम मंदिर के निर्माण में अपनी कमाई का हिस्सा योगदान के रूप में दिया था, क्योंकि सभी के जेहन में इस बात को लेकर खुशी थी कि इतने लंबे संघर्ष के बाद अयोध्या नगरी में राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। इसी को देखते हुए लोगों ने खुले दिल से योगदान दिया था। अब जब राम मंदिर के दानपात्र में घपलेबाजी का मामला सामने आया है, तो मैं फिर से इस बात को दोहराते हुए कह रहा हूं कि इस घपलेबाजी में शामिल लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।

अगर हमारे देश में राम मंदिर के दानपात्र में घपलेबाजी हो रही है, तो आप इस बात का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं कि सिस्टम कितना लचर हो चुका है। इसके बावजूद कुछ लोग इन सब बातों को भूलकर सिर्फ हमें तथ्यों और मूल्यों का पाठ पढ़ा रहे हैं। अब ऐसे में मेरा सवाल है कि क्या हम इन तथ्यों और मूल्यों को स्वीकार कर सकते हैं। एक तरफ जहां आप आस्था के नाम पर इतना बड़ा घोटाला करते हैं और दूसरी तरफ मूल्यों और तथ्यों की बातें करते हैं, तो इससे आपका दोहरा मापदंड सामने आता है, जिसे जाहिर सी बात है कि किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा कि राम मंदिर के दानपात्र के घपलेबाजी में शामिल लोगों को खोजकर निकाला जाए, चाहे वो जहां कहीं भी हों। यह केंद्र सरकार का कर्तव्य बनता है। केंद्र सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर उसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। अब हमें इस मामले में देखने को मिलेगा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर तो नहीं है?

इसके अलावा उन्होंने भारत और फ्रांस के रिश्तों को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक फ्रांस के साथ हमारा रिश्ता वर्षों पुराना है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जैक शिराक ने भी भारत का दौरा किया था और हमने उनकी मेजबानी की थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ फ्रांस के साथ हमारे रिश्ते प्रगाढ़ होते गए। अब प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया है, तो इसमें कोई श्रेय लेने की जरूरत नहीं है, बल्कि ये तो एक परंपरा है। परंपरा के तौर पर जी -7, फिर जी -8 सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। इसमें कोई नई बात नहीं है।

--आईएएनएस

एसएचके/वीसी