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राम मंदिर दान चोरी और हरिद्वार में संतों की हुई हत्या की निष्पक्ष जांच हो: महंत भक्तियारण दास

 

नासिक, 21 जुलाई (आईएएनएस)। तीनों अनी अखाड़ों के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत डॉ. भक्तियारण दास महाराज ने अयोध्या राम मंदिर दान मामले में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को दंड मिलना चाहिए। इस पूरे मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने हरिद्वार में दो संतों की हत्या की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उत्तराखंड सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

हरिद्वार में दो संतों की हत्या पर महंत डॉ. भक्तियारण दास ने कहा कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि 'हरि का द्वार', देवभूमि और संतों की तपोभूमि है। ऐसे पवित्र स्थान पर संतों के साथ इस प्रकार की घटना होना बेहद दुखद और चिंताजनक है। जब धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले और समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने वाले संतों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं, तो इससे लोगों की धार्मिक आस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि घटना के पीछे कौन लोग हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार एक निष्पक्ष जांच समिति गठित करती है तो पूरे मामले में 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा। उत्तराखंड जैसी पवित्र भूमि पर संतों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार या हिंसा निंदनीय है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।

अयोध्या राम मंदिर दान मामले में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी पर महंत डॉ. भक्तियारण दास ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही एसआईटी का गठन कर चुकी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने जांच को व्यापक और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से बड़े स्तर की एसआईटी गठित करने का सुझाव दिया। सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम स्वागत योग्य है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने कोई गलती की है या दान राशि में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए। अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और पूरी दुनिया की नजर इस मंदिर पर है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर उसका निष्पक्ष तरीके से परीक्षण होना आवश्यक है, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।

डॉ. भक्तियारण दास ने कहा कि यदि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होती है, तो इससे देश के अन्य बड़े धार्मिक संस्थानों और मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े लोगों को भी सीख मिलेगी। जवाबदेही तय होने से भविष्य में कोई भी पदाधिकारी इस प्रकार की कथित अनियमितता करने से पहले कई बार सोचेगा और धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता और मजबूत होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में राजनीति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जानकारी के अनुसार, कथित अनियमितता मंदिर के दानपात्र के भीतर नहीं, बल्कि दान राशि को बैंक में ले जाने और उसकी गिनती के दौरान हुई बताई जा रही है। इसलिए जांच का दायरा उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचना चाहिए, जिनकी निगरानी में धन की गिनती और प्रक्रिया पूरी की गई।

उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया में किसी बैंक अधिकारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। धार्मिक संस्थाओं का संचालन धार्मिक मर्यादाओं और कानूनी व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जवाबदेही कानून के दायरे में तय होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत दंड मिलना चाहिए। इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके