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राम मंदिर चंदा विवाद पर भाजपा का पलटवार, अखिलेश पर लगाया तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप

 

लखनऊ, 22 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री धर्मपाल सिंह और दानिश आजाद अंसारी राम मंदिर चंदे पर विवाद सहित अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रियाएं दी।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदे विवाद को लेकर प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, "एसआईटी ध्यान रखे। कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं।'' अखिलेश यादव के इस बयान पर भाजपा के मंत्रियों ने पलटवार किया है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, "एसआईटी का समय पूरा हो गया है, जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्रवाई करेगी। जो लोग तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि मदरसों और मजारों में कहां गड़बड़ियां हुई हैं।"

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के गठबंधन पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा, "पहले भी सपा-बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन सफल नहीं हुए। ये लोग भविष्य में भी नहीं सफल होंगे। उत्तर प्रदेश की जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि कांग्रेस-सपा साथ लड़ें या अलग-अलग।"

मंत्री ने कहा, "सपा अपराधबोध ग्रसित पार्टी है। सपा सरकार के दौरान एक सैफई के आसपास क्षेत्रों में विकास किया जाता था। इसके साथ ही यादव परिवार में विकास की धनराशि वितरित होती थी। अब जनता समझ चुकी है, 2027 में भी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनेगी। अखिलेश यादव के एजेंडे में मुस्लिम और मुस्लिमपरस्ती है।"

राम मंदिर चंदा विवाद पर मंत्री ने कहा, "अखिलेश यादव मुसलमानों को खुश करने के लिए इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। वह धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "समाजवादी पार्टी कल्पनाओं की दुनिया में जी रही है। उन्हें जमीनी हकीकत का पता नहीं है। अगर वे जमीन पर उतरें, तो देखेंगे कि जनता 2024 में उनके झूठ का जवाब देने के लिए तैयार है। 2027 में उत्तर प्रदेश में भाजपा भारी बहुमत से सरकार बनाएगी। इस बार समाजवादी पार्टी 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की डबल-इंजन सरकार ने कभी भी पसमांदा मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक के तौर पर नहीं देखा। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ही उन्हें वोट बैंक मानती थीं।"

--आईएएनएस

ओपी/वीसी