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राम मंदिर चढ़ावा केस जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समिति गठित: गोविंद गिरी

 

अयोध्या, 6 जुलाई (आईएएनएस)। अयोध्या स्थित रामलला मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को हुई करीब तीन घंटे लंबी आपात बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। ट्रस्ट ने चंपत राय की जगह ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी।

बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चोरी की घटना को 'लज्जाजनक' बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक ट्रस्ट कोई ढिलाई नहीं बरतेगा और पूरे मामले की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है। रामलला मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को निर्धारित तिथि से पहले बुलाई गई विशेष बैठक करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए।

ट्रस्ट के नए सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया है। मामले की समीक्षा के लिए अगली बैठक 22 जुलाई को होगी। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा कि चढ़ावा चोरी की घटना पूरे ट्रस्ट और रामभक्तों के लिए अत्यंत पीड़ादायक और लज्जाजनक है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लाखों लोगों ने त्याग किया है, ऐसे में इस तरह की घटना सभी को आहत करने वाली है।

गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय ने स्वयं यह कहते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया कि जब तक चोरी के आरोपी गिरफ्तार होकर उन्हें दंड नहीं मिल जाता, तब तक उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। ट्रस्ट के संविधान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वरिष्ठ ट्रस्टी के. पाराशरण ने स्पष्ट किया कि किसी पदाधिकारी का त्यागपत्र मिलते ही उसे स्वीकार किया जाना संविधान का प्रावधान है। इसी प्रक्रिया के तहत चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए गए।

उन्होंने कहा कि चंपत राय ने मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के गठन से लेकर अब तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी अनुपस्थिति में कार्यों के संचालन के लिए कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। चोरी की घटना को लेकर उठ रहे सवालों पर ट्रस्ट ने सफाई भी दी।

गोविंद देव गिरी ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से यह प्रचार किया जा रहा है कि मंदिर से दानपात्र के अलावा कई बहुमूल्य धार्मिक धरोहरें भी गायब हो गई हैं। उन्होंने इसे भ्रामक बताते हुए कहा कि ट्रस्ट के पास रामायण, चरण पादुका समेत करीब 2,800 धार्मिक एवं ऐतिहासिक वस्तुओं का विधिवत पंजीकृत रिकॉर्ड मौजूद है। आवश्यकता पड़ने पर इनका रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से दिखाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ट्रस्ट ने एक छोटी समिति गठित की है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश जी हवारे शामिल हैं, जिन्होंने 10 साल तक शिरडी संस्थान का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया था। हमने इस तीन सदस्यीय समिति को अंतिम रूप दे दिया है, वे अलग-अलग उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेंगे और हमें नाम सौंपेंगे, जिनमें से हम अंतिम चयन करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि साथ ही विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर निर्णय लिया जाएगा।

गोविंद देव गिरी ने दोहराया कि 'चोरी, चोरी होती है' और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और जिन लोगों को मंदिर में संरक्षित धार्मिक वस्तुओं को लेकर कोई संदेह है, वे नियमानुसार ट्रस्ट से संपर्क कर उनका रिकॉर्ड देख सकते हैं।

--आईएएनएस

विकेटी/डीकेपी