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राम मंदिर सीईओ की नियुक्ति पर विपक्ष का हमला, बोले- नहीं मिटेगा चंदा चोरी का दाग

 

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के तौर पर एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मंदिर में चंदे और कथित अनियमितताओं से जुड़े पुराने आरोपों का मुद्दा उठाते हुए नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने इसे राम मंदिर ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताया और कहा कि ट्रस्ट जिसे चाहे सीईओ नियुक्त कर सकता है।

मुंबई में कांग्रेस विधायक विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कहा कि यदि पहले कथित तौर पर सब कुछ लूट लिया गया और अब केवल सीईओ बदल दिया गया, तो इससे आरोपों का दाग खत्म नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों ने श्रद्धा और आस्था के साथ मंदिर में दान दिया था और उस धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस धन का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया और राजनीतिक दलों को तोड़ने की कोशिशों में इसका उपयोग हुआ।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि केवल सीईओ बदलने से किसी कथित भ्रष्टाचार के आरोपी को निर्दोष नहीं माना जा सकता। यदि किसी को लगता है कि राजनीतिक दल बदलने से भ्रष्टाचार के आरोप खत्म हो जाते हैं, तो उसी तरह राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बदलने से भी पूरा मामला समाप्त नहीं हो सकता।

शिमला में एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि नई नियुक्ति पर टिप्पणी करने से पहले राम मंदिर से जुड़े पुराने विवाद की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि चंदे की कथित चोरी का विवाद सामने आने के बाद तत्कालीन सीईओ और ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की भूमिका को लेकर देशभर में नाराजगी का माहौल बना था।

राठौर ने कहा कि सरकार की ओर से एसआईटी जांच कराई गई थी, लेकिन इससे अपेक्षित नतीजा नहीं निकला और संबंधित लोगों को क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद पुराने सदस्यों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक संस्था के संचालन के लिए रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को नियुक्त करने का फैसला कितना उचित है। सैन्य अधिकारी का विशेषज्ञता क्षेत्र राष्ट्रीय रक्षा है और भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी प्रदर्शन कमजोर होने पर सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति की परंपरा शुरू हो सकती है।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कहा कि केवल किसी एक व्यक्ति को सीईओ बनाने से पुराने सवाल खत्म नहीं होंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुरुआत से ही राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित ‘चंदा चोरी’ के मामले को उठाया है।

अवधेश प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बताते हुए कहा कि मंदिर में करोड़ों श्रद्धालु आते हैं और दान देते हैं। उन्होंने दावा किया कि विवाद सामने आने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और चढ़ावे में कमी आई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से कोर्ट की निगरानी में कमेटी बनाकर मामले की जांच कराने की मांग की जाती रही है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से जुड़े कथित बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि कोषाध्यक्ष ने मामले के संबंध में यह कहा था कि वह कभी वहां आए ही नहीं और उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए, इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति दी गई।

मुंबई में मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि राम मंदिर का प्रबंधन संबंधित लोगों का अपना मामला है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जिसे सीईओ बनाना चाहे, जिसे रखना चाहे या जिसे हटाना चाहे, वह उसका निर्णय है। हालांकि, मंदिर में कथित चोरी से जुड़े विवाद पर उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़े लोगों की ओर से ही इसे चोरी के बजाय ‘लूट’ बताया गया था। कासमी ने कहा कि इस मामले को राम मंदिर से जुड़े लोगों को ही देखना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके