राम के नाम पर कमाई और सत्ता हासिल करने वाले सच्चे भक्त नहीं: हन्नान मोल्लाह
नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता हन्नान मोल्लाह ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की। साथ ही, भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान उन्होंने कई अन्य मुद्दों पर भी टिप्पणी की।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि जो लोग स्वयं को राम का ठेकेदार बताते हैं, वे वास्तविक अर्थों में राम भक्त नहीं हैं। सच्चा भक्त भगवान से डरता है और गलत कार्य करने से बचता है, जबकि उनके अनुसार राम के नाम का इस्तेमाल करने वाले लोग भगवान के नाम पर धन कमा रहे हैं, जनता को आपस में लड़ा रहे हैं और सत्ता हासिल कर रहे हैं। ऐसे लोग राम का राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और यही लोग धर्म तथा देश के भी विरोधी हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में बनाई गई जांच समिति से कोई बड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद नहीं है। छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित कर दिया जाएगा, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंचेगी। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सर्वोच्च स्तर की स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। मौजूदा कार्रवाई केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
अयोध्या के कुछ संतों द्वारा चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किए जाने और समाजवादी पार्टी पर राम मंदिर को बदनाम करने के आरोपों के संबंध में पूछे गए सवाल पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि यदि घटनाएं सार्वजनिक रूप से सामने आई हैं तो उसे बदनाम करने का सवाल नहीं उठता। ईंट संग्रह अभियान के समय से ही धन के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं। जमीन की खरीद, निर्माण कार्यों और अन्य प्रक्रियाओं में भी अनियमितताएं हुईं। ट्रस्ट की नियुक्तियां केंद्र सरकार के स्तर पर हुई हैं, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी सरकार की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की, साथ ही कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
गुजरात एटीएस द्वारा आतंकवादी संगठन से जुड़े आठ संदिग्धों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हाल के महीनों में कई राज्यों से ऐसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मुस्लिम पहचान का भेष धारण कर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई। जासूसी जैसे अपराध किसी भी देश में हो सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी समुदाय को बदनाम करने के लिए यदि कोई साजिश होती है तो उसे भी सामने लाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों के पीछे आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इंडिया ब्लॉक द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के संबंध में पत्र लिखे जाने पर हन्नान मोल्लाह ने कहा कि पत्र में आरोप लगाया गया है कि भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न आयोगों की स्वायत्तता समाप्त की जा रही है और उन्हें सरकार के प्रभाव में लाया जा रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाया कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। विपक्षी मतदाताओं को वोटर सूची से हटाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा है।
हन्नान मोल्लाह ने कहा कि विपक्ष ने इसी कारण चुनावी प्रक्रिया, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। अदालत ही अंतिम संवैधानिक संस्था है, जहां इस प्रकार के मामलों में न्याय की उम्मीद की जा सकती है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए मोल्लाह ने कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर बातचीत शुरू करने की अपील की गई है। पड़ोसी देशों को बदला नहीं जा सकता, इसलिए संवाद ही समाधान का रास्ता है। हथियारों से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा और दोनों देशों के बीच बैठकर बातचीत होनी चाहिए। घृणा का माहौल किसी के हित में नहीं है और युद्ध की बजाय संवाद के माध्यम से ही समस्याओं का समाधान संभव है।
--आईएएनएस
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