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बिहार में राज्यसभा चुनाव: NDA की जीत लगभग तय, विपक्षी विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे

 

बिहार में चल रहे राज्यसभा चुनाव के बीच सियासत और रणनीति का नया अध्याय देखने को मिल रहा है। पांच सीटों के लिए जारी इस चुनाव में केवल मतदाता ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दल भी अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। वोटिंग प्रक्रिया में अब तक कुल 239 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

सूत्रों के अनुसार, एनडीए खेमे के सभी विधायक मतदान कर चुके हैं, जिससे गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत दिखाई दे रही है। एनडीए का दावा है कि यह सुनिश्चित कर देगा कि पांचों राज्यसभा सीटें उनके खाते में जाएँ। वहीं, विपक्षी खेमे की रणनीति अब चुनौतीपूर्ण हो गई है।

विपक्षी दलों से अब तक 4 विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे हैं, जिनमें कांग्रेस के तीन विधायक और आरजेडी का एक विधायक शामिल है। चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर शाम 4 बजे तक ये विधायक मतदान के लिए नहीं पहुँचते हैं, तो एनडीए की सभी पांच सीटों पर जीत लगभग पक्की मानी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव में सिर्फ सीट जीतना ही नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर और विपक्ष के सामने राजनीतिक संदेश देना भी महत्वपूर्ण है। एनडीए ने अपने सभी उम्मीदवारों के लिए मजबूत रणनीति बनाई है और पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित किया है। वहीं, विपक्ष की यह कोशिश कि एनडीए को चुनौती दी जाए, फिलहाल सफल नहीं दिखाई दे रही।

चुनाव के दौरान सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया को लेकर विधानसभा में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सभी विधायकों और दलों को शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा बलों और चुनाव अधिकारियों ने सुनिश्चित किया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अवरोध न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में राज्यसभा चुनाव का यह चरण न केवल पांच सीटों की लड़ाई है, बल्कि राजनीतिक शक्ति संतुलन और भविष्य के सत्ता समीकरण का परीक्षण भी है। एनडीए की मजबूती और विपक्षी खेमे की कमी ने इस चुनाव को एनडीए के पक्ष में झुका दिया है।

राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि अगर मतदान समाप्त होने तक विपक्षी विधायक नहीं पहुँचते, तो एनडीए की पूर्ण जीत राज्य की सियासत में नया अध्याय लिख देगी। इससे न केवल गठबंधन की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि आगामी विधानसभा और केंद्रीय सियासी घटनाओं में भी इसका असर दिखेगा।

इस तरह बिहार में राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ पांच सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि सियासत और रणनीति का खेल बन गया है। जैसे ही मतदान समाप्त होगा और वोटों की गिनती शुरू होगी, स्पष्ट हो जाएगा कि एनडीए का पलड़ा भारी है और विपक्ष चुनौती देने में पिछड़ गया है।