×

राजस्थान: 700 एकड़ में फैला 7वीं सदी का यह किला, जहां भीम के पैर पटकने से बना था जलाशय

 

चित्तौड़, 7 मई (आईएएनएस)। समृद्ध विरासत व इतिहास की गाथा कहती रेत की धरती यानी राजस्थान में ऐसे कई मंदिर, किला व महल हैं, जिनकी बनावट से लेकर सुंदरता और इंजीनियरिंग कमाल की है। साथ ही ये अपने आप में वीरता की कहानी भी समेटे हुए हैं। राजस्थान के चित्तौड़ का चित्तौड़गढ़ किला समृद्ध विरासत और शौर्य की अमर गाथाओं का जीवंत प्रतीक है।

7वीं शताब्दी में निर्मित यह विशाल किला 700 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जो राजपूताना की अदम्य हिम्मत और गौरव का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव वीर भीम के पैर पटकने से यहां एक जलाशय बन गया था, जिसे आज भीमताल कुंड के नाम से जाना जाता है। यह किला 180 मीटर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इसकी लंबाई करीब 6 किलोमीटर और चौड़ाई 1500 मीटर है।

किले की बाहरी दीवार 13 किलोमीटर लंबी है, जो पूरे परिसर को घेरे हुए है। इस प्राचीन किले में 65 ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं, जिनमें 4 महल, 19 बड़े मंदिर, 20 जलाशय, कई स्मारक और विजय स्तंभ शामिल हैं। किले का निर्माण 7वीं सदी में मौर्य वंश के राजा चित्रांगद ने करवाया था। लोक मान्यताओं के अनुसार, भीम ने यहां अपने पैर से भूमि पर प्रहार किया था, जिससे पानी निकल आया और भीमताल का निर्माण हुआ।

खास बात है कि किले में प्रवेश के लिए सात भव्य द्वार बने हैं- राम पोल, लक्ष्मण पोल, पाडल पोल, गणेश पोल, जोरला पोल, भैरों पोल और हनुमान पोल। इनमें सबसे प्रमुख सूर्य पोल है, जो मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है।

चित्तौड़गढ़ किले ने इतिहास के तीन बड़ी घटनाओं का सामना किया। अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण, रानी पद्मिनी का जौहर और गौरा-बादल का बलिदान जैसी घटनाएं इस किले को वीरता और त्याग का प्रतीक बनाती हैं। राजपूत महिलाओं और पुरुषों ने यहां अपनी आन-बान और शान बचाने के लिए संघर्ष किया। किले की वास्तुकला बेहद आकर्षक है। बारीक नक्काशी, विशाल स्तंभ और मंदिरों की सुंदरता देखकर पर्यटक प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते।

शाम को यहां होने वाला लाइट एंड साउंड शो किले के पूरे इतिहास को जीवंत कर देता है। शो में अलाउद्दीन खिलजी के हमले, रानी पद्मिनी के जौहर और राजपूत वीरता की गाथाएं रोशनी और ध्वनि के माध्यम से प्रस्तुत की जाती हैं। यह शो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रोजाना शाम 7 बजे से 8 बजे तक चलता है।

चित्तौड़गढ़ किले के पास फोर्ट रोड मार्केट भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां पारंपरिक राजस्थानी हस्तशिल्प, बांधनी कपड़े, कढ़ाई वाले परिधान, लकड़ी के खिलौने और मिट्टी के बर्तन आदि खरीदे जा सकते हैं। किले से करीब 15 किलोमीटर दूर नागरी गांव है, जिसका इतिहास 443 ईसा पूर्व तक जाता है। यह प्राचीन काल में माध्यमिका नाम से जाना जाता था और मौर्य-गुप्त काल में समृद्ध रहा।

इसके अलावा, रावतभाटा में स्थित बरोली मंदिर समूह 9वीं शताब्दी की गुर्जर-प्रतिहार शैली का उत्कृष्ट नमूना है। चित्तौड़गढ़ किला सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि राजपूत संस्कृति, वीरता और बलिदान की जीती-जागती किताब है। इतिहास प्रेमी और पर्यटक यहां बड़ी संख्या में आकर राजपूताना की शान और गौरव को करीब से महसूस करते हैं।

चितौड़ तक पहुंचने के लिए प्रमुख हवाई अड्डा महाराणा प्रताप हवाई अड्डा (यूडीआर) उदयपुर है। वहीं, निकटतम रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन (सीओआर) है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी