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राजस्थान हाईकोर्ट ने दिहाड़ी मजदूरों के लिए बड़ा फैसला सुनाया, न्यूनतम मजदूरी अब 30 दिनों के आधार पर

 

राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार (10 मई) को दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दैनिक वेतन भोगियों की न्यूनतम मजदूरी की गणना अब महीने के 26 दिनों के बजाय 30 दिनों के आधार पर की जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि दिहाड़ी मजदूरों को उनके श्रम का पूरा और उचित भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि यह संशोधन शीघ्र लागू किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला दिहाड़ी मजदूरों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इससे मजदूरों की आय में बढ़ोतरी होगी और उन्हें पूर्ण माह के लिए उचित मजदूरी मिलने का अधिकार सुनिश्चित होगा।

राजस्थान में दिहाड़ी मजदूरों की संख्या काफी अधिक है और वे अधिकांशतः निर्माण, कृषि और छोटे उद्योगों में कार्यरत हैं। अदालत का यह निर्णय उनके जीवन स्तर में सुधार और सामाजिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है।

सरकारी अधिकारियों ने आदेश का पालन करते हुए न्यूनतम मजदूरी अधिसूचना और परिपत्रों में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे मजदूरों के हितों की रक्षा और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह निर्णय राजस्थान और अन्य राज्यों में दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति सुधारने में मार्गदर्शक साबित हो सकता है।