राजस्थान हाईकोर्ट ने BSF जवान पवन प्रजापति की 22 साल पुरानी बर्खास्तगी को VRS में बदला
राजस्थान हाईकोर्ट ने बीएसएफ (BSF) के जवान पवन प्रजापति को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी करीब 22 साल पुरानी बर्खास्तगी के आदेश को संशोधित करते हुए इसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (VRS) में बदल दिया। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने जवान और केंद्र सरकार द्वारा दायर अपीलों की संयुक्त सुनवाई के बाद पारित किया। अदालत ने यह फैसला 27 फरवरी को सुनाया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रजापति से गलती हुई है, लेकिन उनके अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के मुकाबले सीधे बर्खास्तगी जैसी कठोर सजा न्यायोचित नहीं है। इस फैसले से प्रजापति को अब कानूनी और पेंशन संबंधी मामलों में राहत मिल गई है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पेंशन हेतु आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी होने तक प्रजापति की सेवा को काल्पनिक (नोशनल) नियमित सेवा माना जाएगा। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के लिए उन्हें वेतन और भत्तों के हकदार नहीं बनाया जाएगा। इस आदेश से प्रजापति को पेंशन संबंधी अधिकार प्राप्त होंगे, जबकि वित्तीय लाभ तत्काल नहीं मिलेंगे।
जानकारी के अनुसार, पवन प्रजापति को बीएसएफ में उनकी सेवा के दौरान 22 साल पहले किसी अनुशासनिक कारण से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने न्यायिक मार्ग अपनाया और अदालत में अपील दायर की थी। लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में राहत का आदेश दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनिक मामलों में सजा और परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करने का उदाहरण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर गलती के लिए कठोर सजा जरूरी नहीं होती और सजा की कठोरता और अपराध की प्रकृति में संतुलन होना चाहिए।
इस आदेश के बाद प्रजापति और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनके वकील ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अदालत ने न केवल उनके मुवक्किल के हक में न्याय किया है, बल्कि यह फैसला अनुशासनिक मामलों में समान परिस्थितियों में अन्य जवानों के लिए भी मार्गदर्शन साबित होगा।
बीएसएफ और केंद्र सरकार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि प्रजापति की गलती के बावजूद उनके सेवा रिकॉर्ड और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए उन्हें VRS के माध्यम से सम्मानजनक रूप से सेवा समाप्ति का अवसर प्रदान किया गया।
इस तरह, राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश पवन प्रजापति के लिए कानूनी राहत और पेंशन अधिकारों की गारंटी लेकर आया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अदालत अनुशासनिक मामलों में सजा की उचितता और मानवीय पहलुओं को गंभीरता से देखती है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद, प्रजापति अब पेंशन पात्रता पूरी होने पर अपने अधिकारों का लाभ ले सकेंगे। वहीं यह मामला अन्य जवानों और अनुशासनिक मामलों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जो यह दिखाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में धैर्य और सही कानूनी कदमों से लंबे समय बाद भी न्याय मिल सकता है।