राजस्थान में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ावा, केंद्र ने सस्ती चार्जिंग योजना को दी मंजूरी
राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। शहरी क्षेत्रों और हाईवे पर सस्ती चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार किए गए राज्य के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है।
इस योजना के तहत राज्य में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विस्तार दिया जाएगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिल सके और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम की जा सके।
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड द्वारा तैयार इस विस्तृत प्लान में प्रमुख शहरों, राष्ट्रीय राजमार्गों और औद्योगिक क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं को लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चार्जिंग की समस्या से राहत देना है।
केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य में चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। पहले चरण में प्रमुख शहरों और हाईवे कॉरिडोर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में छोटे शहरों और कस्बों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल राजस्थान को ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और उपयोग में भी तेजी आने की संभावना है।
केंद्र सरकार भारत के अनुसार, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना राष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति का अहम हिस्सा है। इसी कारण राज्यों को ऐसे प्रस्तावों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना से आम उपभोक्ताओं को सबसे अधिक फायदा मिलेगा, क्योंकि सस्ती और सुलभ चार्जिंग उपलब्ध होने से ईवी चलाने की लागत और भी कम हो जाएगी। साथ ही हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा भी आसान हो सकेगी।
राजस्थान ऊर्जा विभाग के अनुसार, भविष्य में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी, जिससे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत चार्जिंग स्टेशन तेजी से विकसित किए जा सकें।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की यह मंजूरी राजस्थान में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली को नई गति मिलने की उम्मीद है।