बारिश ने बदला मिजाज: पहलगाम में बादल फटने से बाढ़, वीडियो में जाने उत्तराखंड में लैंडस्लाइड; देश के 70% हिस्से से मानसून कमजोर
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आई हैं। वहीं दूसरी ओर, देश के करीब 70 फीसदी हिस्से से मानसूनी बादलों के कमजोर पड़ने के कारण कई राज्यों में बारिश का दौर थम गया है।
शनिवार रात जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया। तेज बहाव के कारण कई खेत तबाह हो गए, जबकि सड़क का एक हिस्सा भी पानी में बह गया। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेना शुरू कर दिया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। राहत और बचाव दल भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
उधर, उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के चलते लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास बड़ा भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिरने के कारण वहां खड़ी कई गाड़ियां और निर्माण कार्य में लगी मशीनें दब गईं। घटना के बाद इलाके में कामकाज प्रभावित हुआ। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
मैदानी इलाकों में थमी मानसून की रफ्तार
जहां पहाड़ी राज्यों में बारिश आफत बन रही है, वहीं उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में मानसून की गतिविधियां काफी कमजोर पड़ गई हैं। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला लगभग थम गया है। इससे लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है और किसानों की भी चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान से आ रही सूखी हवाएं बनीं वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के कमजोर पड़ने के पीछे पाकिस्तान की ओर से आने वाली सूखी हवाएं प्रमुख कारण हैं। मौसम संबंधी वेबसाइट 'ऑल इंडिया वेदर' की रिपोर्ट के मुताबिक ये शुष्क हवाएं केवल उत्तर-पश्चिम भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अरब सागर, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों तक भी फैल गई हैं। इन हवाओं के कारण मानसूनी बादलों का विकास प्रभावित हो रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां कम हो गई हैं।
पहाड़ी राज्यों में बरतनी होगी सतर्कता
मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रह सकती है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूखी हवाओं का प्रभाव कम होता है और मानसूनी सिस्टम दोबारा सक्रिय होता है, तो आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश की वापसी हो सकती है। फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज असंतुलित बना हुआ है, जहां एक ओर पहाड़ों में बारिश तबाही मचा रही है तो दूसरी ओर मैदानी क्षेत्रों में मानसून की बेरुखी लोगों की चिंता बढ़ा रही है।