राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला: वोट चोरी, फुटेज में देंखे सरकार चोरी के बाद अब पार्टी चोरी; TMC विवाद पर बोले
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की रोक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और जनादेश से जुड़ा मुद्दा है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पहले वोट चोरी, फिर सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना, NCP और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी के मुताबिक, पहले एक पार्टी में विभाजन होता है और उसके बाद चुनाव चिह्न को लेकर विवाद खड़ा होता है।
उन्होंने लिखा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। उनके अनुसार, हर बार BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं और फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया।दरअसल, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी। यह फैसला पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच चल रहे विवाद के बीच लिया गया। आयोग ने दोनों गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में मूल पार्टी नाम और चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया। दोनों गुटों से नए नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए।
यह मामला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से जुड़ा है। चुनाव आयोग का यह आदेश फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू है। आयोग की ओर से दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में लिया जाना है।राहुल गांधी ने अपने बयान में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP के पुराने विवादों का भी जिक्र किया। शिवसेना में जून 2022 में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट अलग हुए थे। इसके बाद चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर विवाद हुआ। इसी तरह जुलाई 2023 में NCP में शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट अलग हुए थे।
राहुल गांधी ने इन घटनाओं को तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विवाद से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मूल नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोकता है और आगामी उपचुनाव के लिए अलग पहचान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़ा है।TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर यह विवाद अब पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में आयोग की आगे की प्रक्रिया और दोनों गुटों के दावों पर होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि मूल पार्टी की पहचान को लेकर अंतिम निर्णय क्या होता है।