राहुल गांधी नकली गुस्सा दिखाने वाले प्रोफेशनल आंदोलनकारी: तुहिन सिन्हा
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें नकली गुस्सा दिखाने वाला प्रोफेशनल आंदोलनकारी बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि देश संविधान से चलता है, बेवजह मनुस्मृति को गलत संदर्भ में पेश कर हिंदू मान्यताओं पर हमला करना उनका रोज का काम बन गया है, जबकि महात्मा गांधी ने खुद 1928 में मनुस्मृति की कई बातों को जीवन में अपनाने योग्य बताया था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने कहा, "एक हफ्ते पहले सीएम हेमंत सोरेन ने झारखंड के गरीब स्टूडेंट्स को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 सालों में हुए सभी एग्जाम कैंसिल कर दिए जाएंगे, लेकिन उन्हें तुरंत पता चल गया कि ऐसा नहीं हो सकता। इसके तुरंत बाद झारखंड हाई कोर्ट ने इस आदेश को खारिज कर दिया।"
उन्होंने आगे कहा कि अब स्टूडेंट्स बहुत गुस्से में हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनके साथ धोखा हुआ है, और उन्हें लगता है कि यह धोखा सीधे हेमंत सोरेन और राहुल गांधी ने किया है। गुस्से और नाराजगी में जेएमएम के कार्यकर्ता कथित तौर पर रांची के साथ-साथ कोडरमा और हजारीबाग में भी हर दिन गरीब स्टूडेंट्स को पीट रहे हैं।
राहुल गांधी के मनुस्मृति वाली टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "राहुल गांधी को यह समझने की जरूरत है कि यह देश संविधान से चलता है, मनुस्मृति से नहीं। इसलिए, किसी न किसी मुद्दे पर बेवजह मनुस्मृति को गलत कॉन्टेक्स्ट में कोट करना और एक तरह से हिंदू मान्यताओं पर हमला करना राहुल गांधी का रूटीन बन गया है।"
तुहिन सिन्हा ने कहा कि आपने देखा होगा कि जब संसद में भी छात्रों के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, उस समय एक तरफ प्रियंका गांधी वाड्रा ने अचानक आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर को 'गोमूत्र एक्सपर्ट' कह दिया, तो दूसरी तरफ खड़गे ने उस दिन फिर मनुस्मृति पर हमला किया।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी को यह जानने की जरूरत है कि 1928 में महात्मा गांधी ने एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने यह भी कहा था कि मनुस्मृति में कुछ बातें इतनी अच्छी हैं कि उन्हें आज की जिंदगी में जरूर मानना चाहिए।
पुणे में आयोजित किए गए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर सिन्हा ने कहा, "राहुल गांधी एक प्रोफेशनल आंदोलनकारी बन गए हैं। एक दिन महिलाओं के बारे में, दूसरे दिन युवाओं के बारे में, तीसरे दिन किसानों के बारे में, और चौथे दिन ओबीसी के बारे में। मेरे हिसाब से नकली गुस्सा दिखाना उनका डेली रूटीन बन गया है। आज उनकी जिंदगी का यही एकमात्र मकसद है।"
उन्होंने कहा कि जब वह महिलाओं के हक की बात करते हैं तो सीधा सवाल यह होता है कि उन्होंने तीन तलाक पर बैन का समर्थन क्यों नहीं किया? आज तक एक भी कांग्रेस-शासित राज्य सरकार का नाम बताइए जो यूसीसी का समर्थन करती हो। केंद्र में भी, कांग्रेस पार्टी ने हमेशा यूसीसी का विरोध किया है।
--आईएएनएस
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