×

राहुल गांधी का व्यवहार संसदीय गरिमा के खिलाफ, आपत्तिजनक भाषा बर्दाश्त नहीं: राजेंद्र राठौड़

 

जयपुर, 30 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की उन्होंने निंदा की और कहा कि प्रधानमंत्री का सम्मान पूरे देश का सम्मान है। वहीं, सीजेपी की ओर से आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर सवाल उठाए और राजस्थान में होने वाले नगर निगम एवं पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा की तैयारियों का भी दावा किया।

राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण और उनके व्यवहार पर राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि लोकसभा में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष का आचरण अत्यंत अशोभनीय था। बार-बार टोके जाने के बावजूद राहुल गांधी ने असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, सदस्यों की ओर उंगली उठाई और देश के युवाओं के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। संसद की अपनी निर्धारित नियमावली और प्रक्रियाएं हैं, जिनका पालन करना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है। यदि नेता प्रतिपक्ष ही संसदीय नियमों की अनदेखी करेंगे और बाद में यह कहेंगे कि उनका माइक्रोफोन बंद था, तो इससे संसदीय लोकतंत्र कमजोर होगा। लोकतंत्र में नेता सदन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतनी ही महत्वपूर्ण नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी होती है, इसलिए इस प्रकार का व्यवहार संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने हमेशा संसद की मर्यादा, नियमों और परंपराओं का सम्मान किया। वर्तमान में जिस प्रकार का व्यवहार देखने को मिल रहा है, वह लोकसभा के संसदीय इतिहास को कलंकित करने वाला है। कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह लगातार हंगामा कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास करती है, जबकि देश की जनता सब कुछ देख रही है।

प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करना देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है। लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन अभद्र और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली में हुए आंदोलन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए जिनका न छात्रों से कोई संबंध था और न ही नीट परीक्षा से, बल्कि वे केवल माहौल खराब करने और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करने के उद्देश्य से पहुंचे थे।

उन्होंने कहा कि आंदोलन देश में पहले भी हुए हैं, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति जैसे बड़े आंदोलन भी हुए, लेकिन इस प्रकार की भाषा का प्रयोग पहले कभी देखने को नहीं मिला। पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करना और संसद में घुसकर मारपीट जैसी धमकियां देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सीजेपी द्वारा सरकार पर वादों से मुकरने के आरोप और आंदोलन की चेतावनी पर राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रत्येक निर्णय पूरे देश के लिए कानून के समान होता है। जिन लोगों का छात्र आंदोलन से कोई संबंध नहीं था, जिन पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं और जो आंदोलन में शामिल होकर उसे बदनाम कर रहे थे, उनके संबंध में आए न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए था। सीजेपी का इस फैसले का विरोध करना उनकी समझ से परे है।

राजस्थान में प्रस्तावित नगर निगम और पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा की तैयारियों पर राठौड़ ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन है और चुनाव उसके लिए कोई नई चुनौती नहीं हैं। पार्टी का कार्यकर्ता बूथ स्तर तक हमेशा सक्रिय रहता है और वर्षभर नियमित रूप से बूथ स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भजनलाल सरकार के कार्यकाल में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं, अपराधों में कमी आई है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। इन उपलब्धियों के आधार पर आगामी नगर निगम और पंचायत चुनावों में जनता भाजपा के पक्ष में मतदान करेगी।

--आईएएनएस

पीएसके