राहुल गांधी अभी भी अपरिपक्व, आरएसएस के बारे में बहुत कुछ सीखना बाकी : दिलीप घोष
न्यूटाउन, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने बुधवार को कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। दिल्ली में कॉकरोच के पुतले को जलाने के विवाद से लेकर राहुल गांधी के आरएसएस पर दिए बयान और भारत की तेल नीति तक पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
दिल्ली में कॉकरोच के पुतले को जलाने पर उठ रहे सवालों पर दिलीप घोष ने कहा, "कॉकरोच को जलाना ही चाहिए और राक्षसों के अलग-अलग रूपों को दर्शाने वाले अन्य पुतलों को भी जलाना चाहिए। बंगाल में दुर्गा पूजा को देखिए, हर पंडाल में राक्षस का एक अलग रूप होता है और ऐसे कई पुतले जलाए जाते हैं।"
उन्होंने कहा, "उन्हें नहीं पता कि वहां कितने पुतले जलाए जाते हैं। मैं एक बार दशहरे के दौरान उत्तराखंड के अल्मोड़ा में था, जहां 11 पुतले जलाए जाते हैं। वहां रावण और उसके पूरे परिवार के पुतले जलाए जाते हैं। तो अगर दिल्ली में एक अतिरिक्त पुतला जलाया जाता है, तो किसी को इससे समस्या क्यों होनी चाहिए?"
दिलीप घोष ने कहा, "देशभर में दिल्ली और मुंबई सहित सरकार और जनता को गुमराह करने की कोशिशें की जा रही हैं। विदेशी फंडिंग आ रही है, लोग विदेश से आ रहे हैं और बाहरी स्रोतों से लोगों को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं।"
उन्होंने कहा कि कोलकाता में भी इसी तरह की कोशिशें हो रही हैं, जहां कई व्यक्तियों के जरिए पहले ही बड़ी मात्रा में पैसा आ चुका है और सरकार को भी इसकी जानकारी है। जनता को एकजुट होकर ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहां किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरएसएस पर दिए बयान पर दिलीप घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी क्या मानते हैं, इससे जनता को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें अभी भारत और आरएसएस के बारे में बहुत कुछ सीखना बाकी है। अभी तो सिर्फ 50-55 साल के हुए हैं और वह अभी भी अपरिपक्व हैं। वह स्वतंत्र रूप से सोच नहीं सकते, इसीलिए उनके बयानों का कोई असर नहीं होता।"
भारत के रूस से तेल खरीदने के फैसले पर दिलीप घोष ने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, "हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने बार-बार कहा है कि भारत किससे तेल खरीदता है और किसे बेचता है, यह आंतरिक मामला है। हम ये फैसले अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेंगे। बहुत दबाव था लेकिन हमारे प्रधानमंत्री उसके सामने झुके नहीं। भारत का एजेंडा 'नेशन फर्स्ट' है, और यही हमारी प्राथमिकता रहेगी।"
--आईएएनएस
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