सिलेंडर के लिए तड़के 5 बजे से कतार, 10 बजे एजेंसी ने कहा—आज गाड़ी नहीं आएगी; गुस्साए लोग सड़क पर उतरे
श्रीगंगानगर में एलपीजी गैस की कमी से परेशान उपभोक्ताओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। तड़के सुबह 5 बजे से ही लोग गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडर लेने के लिए कतार में लग गए थे, लेकिन करीब 10 बजे एजेंसी स्टाफ ने सूचना दी कि आज गैस की गाड़ी नहीं आएगी। यह सुनते ही मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई और कई उपभोक्ता विरोध में सड़क पर उतर आए।
जानकारी के अनुसार शहर में पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है। इसी वजह से उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। सोमवार सुबह भी बड़ी संख्या में लोग गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडर लेने के लिए पहुंच गए थे। कई महिलाएं और बुजुर्ग भी सुबह से लाइन में लगे हुए थे।
लोगों का कहना था कि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं दी गई कि आज गैस की गाड़ी नहीं आएगी। यदि समय रहते सूचना मिल जाती तो उन्हें घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ता। करीब पांच घंटे तक कतार में खड़े रहने के बाद जब एजेंसी कर्मचारियों ने गैस नहीं आने की बात कही तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया।
इसके बाद कई उपभोक्ता नाराज होकर एजेंसी के बाहर ही विरोध जताने लगे। कुछ लोग सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि शहर में लगातार गैस संकट बना हुआ है, लेकिन इसके समाधान के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि गैस की कमी के कारण घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों में खाना बनाने तक की परेशानी खड़ी हो गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसियों को गैस की उपलब्धता के बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों तक भी शिकायत पहुंचाई गई। लोगों ने मांग की कि शहर में गैस की आपूर्ति को नियमित किया जाए और एजेंसियों को समय पर जानकारी देने के निर्देश दिए जाएं।
फिलहाल, उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगे भी विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। वहीं प्रशासन से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही स्थिति को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।