☰
×

छिंगताओ में पहला एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन शुरू

 

बीजिंग, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। पहला एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन चीन के शानतोंग प्रांत के छिंगताओ में उद्घाटित हुआ। यह सम्मेलन तीन दिनों तक चलेगा, जिसका विषय 'सतत स्वच्छ पृथ्वी विकास के लिए सुदूर संवेदन अनुप्रयोग' है।

इस सम्मेलन ने 20 देशों और क्षेत्रों के 230 से अधिक विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा संबंधित उद्यमों के विशेषज्ञों और विद्वानों सहित कुल 1000 से अधिक लोगों को आकर्षित किया है।

बता दें कि यह सम्मेलन भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन के क्षेत्र में अत्याधुनिक विकास की ओर उन्मुख है, जो बहु-स्रोत सुदूर संवेदन अवलोकन, उन्नत संवेदन प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण विधियों तथा सतत विकास अनुप्रयोगों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र तथा वैश्विक सुदूर संवेदन विज्ञान कर्मियों के लिए आदान-प्रदान और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच स्थापित करना तथा संसाधन एवं पर्यावरण निगरानी, समुद्री एवं वायुमंडलीय अवलोकन, आपदा आपातकाल, जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत विकास आदि क्षेत्रों में भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के नवीन अनुप्रयोगों को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में चीनी विज्ञान अकादमी के अकादमीशियन कुओ हुआतोंग सहित कई विशेषज्ञों ने भाषण दिए, जिनमें उन्होंने सुदूर संवेदन विज्ञान के अग्रणी क्षेत्र, डिजिटल पृथ्वी, शहरी एवं पर्यावरणीय सुदूर संवेदन, माइक्रोवेव सुदूर संवेदन, पृथ्वी अवलोकन प्रणाली तथा स्थानिक सूचना अनुप्रयोग आदि दिशाओं में नवीनतम अनुसंधान प्रगति और विकास प्रवृत्तियों को साझा किया।

सम्मेलन में 16 समानांतर सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिनके विषय सुदूर संवेदन बड़े मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुदूर संवेदन, वायुमंडलीय और जल विज्ञान सुदूर संवेदन, भूमि सतह और पारिस्थितिक पर्यावरण सुदूर संवेदन, आपदा निगरानी, क्रायोस्फीयर और ध्रुवीय सुदूर संवेदन, शहरी सुदूर संवेदन, सुदूर संवेदन बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म, सतत विकास लक्ष्य अनुप्रयोग आदि पर केंद्रित होंगे।

एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत तथा वैश्विक भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन क्षेत्र की अनुसंधान शक्तियों को एकत्रित करना, दीर्घकालिक और स्थिर शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा सहयोग मंच स्थापित करना और विभिन्न देशों तथा क्षेत्रों के बीच पृथ्वी अवलोकन, सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग क्षेत्रों में समन्वित नवाचार को बढ़ावा देना है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/