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पुणे में सड़क किनारे प्रसव मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, स्वत: संज्ञान लेकर 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

 

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक महिला को कथित तौर पर अस्पताल में भर्ती नहीं किए जाने के बाद सड़क किनारे बच्चे को जन्म देने की घटना पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को गंभीर बताते हुए पुणे जिला प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार से 7 दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक मामला है, जिसमें महिला को कथित तौर पर पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, जिसके बाद उसे सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा। आयोग ने कहा कि स्थानीय लोगों और वहां से गुजर रहे एक डॉक्टर की समय पर मदद से मां और नवजात दोनों की जान बच सकी।

आयोग ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह मामला आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत प्रसव व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करता है।

आयोग ने कहा कि हर महिला को सुरक्षित, सम्मानजनक और अस्पताल में प्रसव कराने का अधिकार है। किसी महिला को सार्वजनिक स्थान पर बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना उसकी प्रजनन स्वास्थ्य, निजता और गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुणे के जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने कहा कि जांच में यह पता लगाया जाए कि इस घटना में किस स्तर पर लापरवाही हुई, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और मां व नवजात के लिए उचित प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में 7 दिन के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी