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शराबबंदी से नहीं रुकती जहरीली शराब से मौतें, वीडियो में जाने सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

 

सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी और जहरीली शराब से होने वाली मौतों को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जबरन शराबबंदी शराब की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। शराब पर पूरी तरह रोक लगाने से शराब का कारोबार भूमिगत हो सकता है और इससे जहरीली शराब के इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाता है। कोर्ट ने कहा कि केवल शराबबंदी लागू करने से शराब की लत और जहरीली शराब से होने वाली मौतों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने 18 सितंबर को महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B को रद्द करने के फैसले के दौरान यह टिप्पणी की। इन नियमों के तहत मेथनॉल की खरीद और उसके भंडारण को नियंत्रित किया गया था। इसके अलावा गैर-दवा निर्माताओं को मेथनॉल बेचने से पहले उसमें रंग और कड़वा पदार्थ मिलाना जरूरी किया गया था।

गुजरात में दशकों से शराबबंदी, फिर भी जहरीली शराब से मौतें

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में दशकों से शराबबंदी लागू है, लेकिन इसके बावजूद जहरीली शराब से होने वाली मौतों का सिलसिला पूरी तरह नहीं रुका है। कोर्ट के मुताबिक मेथनॉल मिली शराब से जुड़े 10 बड़े हादसों में 600 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

कोर्ट ने इस स्थिति को शराबबंदी की प्रभावशीलता से जोड़ते हुए कहा कि शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्वरूप बदल सकता है। यदि अवैध शराब का कारोबार भूमिगत हो जाता है तो उसकी निगरानी और गुणवत्ता पर नियंत्रण और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जहरीली शराब के सेवन से लोगों की जान जाने का खतरा बढ़ सकता है।

जहरीली शराब की घटनाओं पर अधिकारियों को चेताया

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश में हाल में सामने आई जहरीली शराब की घटनाओं का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं अधिकारियों के लिए फिर से सतर्क होने और प्रभावी कार्रवाई करने की याद दिलाती हैं।

कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जहरीली शराब से होने वाली घटनाओं में मेथनॉल के इस्तेमाल को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है। मेथनॉल बेहद जहरीला रसायन है और इसके सेवन से गंभीर विषाक्तता, अंधापन और मौत तक हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यह है कि शराब से जुड़ी समस्या से निपटने के लिए केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। अवैध शराब के कारोबार पर निगरानी, जहरीले रसायनों के दुरुपयोग को रोकना और ऐसी घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई करना भी महत्वपूर्ण है।