प्रियंका चतुर्वेदी ने बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर उठाया सवाल, महंगाई पर सरकार को घेरा
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बाबा राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर सवाल उठाया, और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के महत्व पर जोर दिया।
इसके साथ ही महिलाओं के अधिकारों पर राहुल गांधी पर निशाना साधने वाली बातों का जवाब देते हुए, उन्होंने कहा कि पितृसत्ता एक सामाजिक सोच है, जो सभी धर्मों में पाई जाती है और राजनीतिक पार्टियों से बांटने वाली बहसों के बजाय रोजगार, महंगाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन की गुणवत्ता पर ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि बाबा राम रहीम को लगातार पैरोल मिलना शर्मनाक है। हरियाणा सरकार इस मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? यह किस तरीके की सजा काट रहे हैं, जिसमें आधे से ज्यादा समय वह जेल से बाहर रहते हैं। मैं कहती हूं कि अगर दोषियों से इतना प्रेम है तो उन्हें सरकार क्षमा दान देती है और जेल से निकाल दे। यह कोर्ट ऑर्डर और कानून-व्यवस्था का मजाक बन रहा है।
महिलाओं के अधिकारों पर राहुल गांधी की आलोचना करने वालों को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इसमें हिंदू विरोध कहां से आ गया? हिंदू धर्म में देवी को ज्यादा पूजा जाता है। महिलाओं के सशक्तीकरण और उत्थान को हिंदू विरोधी बताने वाला खुद सनातन विरोधी होगा। यह पुरुष प्रधान देश महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देता।
उन्होंने कहा, "मैं एक बात जरूर कहूंगी कि यह समस्या सिर्फ भाजपा की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक पार्टी की है। पार्टियां महिलाओं की बातें जरूर करती हैं, लेकिन जब उनके उत्थान की बात होती है तो पीछे हो जाती हैं। यह चीजें चुनावी घोषणापत्र में दिखती है। यह मुद्दा धर्म और जाति का नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त करने का है। जब संविधान बना था तब महिलाओं को वोटिंग अधिकार और भागीदारी मुख्य चर्चा का विषय बना था। इसके चलते महिलाओं को समानता का अधिकार दिया गया था। पुरुष प्रधान देश होने के चलते हमने महिलाओं पर पाबंदियां डाली।"
उन्होंने प्याज और चीनी की बढ़ती कीमतों पर कहा, "वित्त मंत्री ने एक बार कहा था कि मैं प्याज नहीं खाती, तो कीमतों से मेरा क्या लेना-देना? पूरी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है कि अगर चीनी या प्याज महंगे हो जाते हैं, तो इससे उन्हें क्या फर्क पड़ता है? इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी, अगर वित्त मंत्री कहें कि मुझे डायबिटीज है और मैं चीनी नहीं खाती, इसलिए मुझे नहीं पता कि चीनी की कीमत क्या है। दुख की बात यह है कि लोग परेशान हैं। उनकी आमदनी नहीं बढ़ रही, रोजगार के मौके नहीं बढ़ रहे और उनके जीवन स्तर में सुधार नहीं हो रहा है, लेकिन महंगाई लगातार बढ़ रही है।"
--आईएएनएस
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