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भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन की तैयारी तेज! 280 KM/H की रफ्तार, जापानी ट्रेन से कम हो सकती है लागत

 

भारत के हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए भारत में ही हाईस्पीड ट्रेनसेट विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और भविष्य में देश के दूसरे हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के लिए स्वदेशी क्षमता तैयार करना है।रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित स्वदेशी ट्रेनसेट को B28 नाम दिया गया है। इसकी डिजाइन स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है, जबकि परिचालन के दौरान इसकी गति करीब 220 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है। दावा है कि ट्रेन 52 सेकंड में शून्य से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है।

वंदे भारत की तकनीक को किया जाएगा अपग्रेड

शुरुआत में मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के लिए जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित ट्रेनसेट खरीदने की योजना थी। लेकिन ट्रेनसेट की आपूर्ति में देरी की आशंकाओं के बीच स्वदेशी विकल्प विकसित करने पर जोर दिया गया।

इस परियोजना में वंदे भारत प्लेटफॉर्म से मिले अनुभव और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए हाईस्पीड ट्रेन विकसित करने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें स्टेनलेस स्टील बॉडी का उपयोग किया जाएगा। हालांकि, हाईस्पीड ट्रेन की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक परीक्षण जरूरी होंगे।

कितनी होगी स्वदेशी बुलेट ट्रेन की रफ्तार?

प्रस्तावित B28 ट्रेनसेट को लेकर रिपोर्ट में ये प्रमुख आंकड़े बताए गए हैं:

  • डिजाइन स्पीड: 280 किलोमीटर प्रति घंटा

  • संभावित परिचालन गति: 220 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा

  • 0 से 100 KM/H: दावा है कि लगभग 52 सेकंड में रफ्तार हासिल कर सकती है

  • निर्माण: भारतीय कंपनियों और संस्थानों की भागीदारी से स्वदेशी ट्रेनसेट विकसित करने की योजना

इन आंकड़ों को अंतिम परिचालन प्रदर्शन नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक गति और तकनीकी क्षमताओं की पुष्टि परीक्षण और आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही होगी।

जापानी ट्रेन से कितनी सस्ती होगी भारतीय बुलेट ट्रेन?

रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी शिंकानसेन ट्रेनसेट की अनुमानित कीमत करीब 460 से 500 करोड़ रुपये बताई गई है। उन्नत तकनीक, भूकंपरोधी व्यवस्था और भारतीय मौसम के अनुरूप बदलावों के कारण लागत और बढ़ सकती है।

इसके मुकाबले, स्वदेशी ट्रेन के एक कोच की लागत करीब 28 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि जापानी कोच की अनुमानित लागत 46 से 48 करोड़ रुपये बताई गई है।

हालांकि, इन आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक कोच की कीमत और पूरे ट्रेनसेट की कीमत अलग-अलग होती हैं। अंतिम लागत ट्रेन के डिजाइन, सुरक्षा प्रणालियों, रखरखाव और अन्य सुविधाओं पर भी निर्भर करेगी।

भारत में कहां तैयार हो रहे हैं हाईस्पीड रेल कोच?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) बेंगलुरु में हाईस्पीड ट्रेनसेट के निर्माण पर काम कर रही है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) भी डिजाइन और तकनीकी विकास में सहयोग कर रही है।

रिपोर्ट में BEML को दो हाईस्पीड ट्रेनसेट के लिए करीब 867 करोड़ रुपये का ठेका दिए जाने का उल्लेख है। साथ ही, ट्रेनसेट की आपूर्ति और रखरखाव से जुड़े बड़े अनुबंध का भी जिक्र किया गया है।

इस परियोजना से भारत में हाईस्पीड रेल निर्माण की तकनीकी क्षमता विकसित होने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रोटोटाइप कब आएगा और ट्रेन कब चलेगी?

रिपोर्ट में स्वदेशी बुलेट ट्रेन के प्रोटोटाइप को दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच पेश करने का लक्ष्य बताया गया है। परीक्षण सफल रहने पर अगस्त 2027 में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के सूरत और वापी के बीच लगभग 97 किलोमीटर के हिस्से पर परिचालन शुरू करने की योजना का भी उल्लेख है।

ये तारीखें प्रस्तावित लक्ष्य हैं। वास्तविक शुरुआत निर्माण कार्य, ट्रायल, सुरक्षा मंजूरी और परियोजना की प्रगति पर निर्भर करेगी।

भविष्य में दूसरे शहरों को भी मिलेगा फायदा?

अगर स्वदेशी हाईस्पीड ट्रेन तकनीक सफल रहती है, तो भविष्य में दिल्ली-वाराणसी, चेन्नई-बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे संभावित हाईस्पीड रेल मार्गों के लिए भी इसका अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इन रूटों पर ट्रेन चलाने की योजना और समयसीमा को अलग-अलग परियोजनाओं की आधिकारिक मंजूरी के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।रिपोर्ट में B35 नाम से एक अन्य स्वदेशी ट्रेनसेट की भी चर्चा है, जिसकी डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है और जिसे 2030 के आसपास तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है।