‘प्रवेश का आधार सिर्फ 12वीं के अंक हों, नीट को पूरी तरह खत्म करें’, तमिलनाडु सरकार ने दोहराई मांग
चेन्नई, 4 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु की वर्तमान टीवीके सरकार ने मेडिकल पाठ्यक्रमों व अन्य उच्च शिक्षा कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट और ऐसी ही अन्य परीक्षाओं को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग दोहराई है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बुधवार को बताया कि सरकार ने केंद्र सरकार की टीम के सामने नीट और ऐसी ही अन्य परीक्षाओं को पूरी तरह से समाप्त करने की सिफारिश की।
तमिलनाडु सीएमओ के अनुसार, बुधवार को चेन्नई स्थित सचिवालय में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली केंद्र सरकार की 'परीक्षा सुधार उच्च-स्तरीय कार्य बल’ समिति के सदस्यों ने मुलाकात की। बैठक के दौरान सरकार ने उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट या इसी तरह की अन्य परीक्षाओं के आयोजन के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “इस बैठक के दौरान, तमिलनाडु सरकार की ओर से उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए नीट या इसी तरह की अन्य परीक्षाओं के आयोजन पर विरोध जताया गया। इसके बजाय, सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवेश का आधार केवल 12वीं कक्षा के अंक होने चाहिए।”
पोस्ट में आगे लिखा गया है, “राज्य सरकार ने समिति के सदस्यों को यह भी याद दिलाया कि तमिलनाडु विधानसभा ने 11 अगस्त 2026 को नीट परीक्षा के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। तमिलनाडु सरकार ने अपना रुख फिर से मजबूती से दोहराया।”
मुख्यमंत्री कार्यालय ने आगे लिखा, “तमिलनाडु सरकार ने अपना रुख दोहराते हुए चिकित्सा और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट और इसी तरह की अन्य परीक्षाओं को समाप्त करने की सिफारिश की है।”
इससे पहले, अगस्त में तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए 'नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट' को खत्म करने की मांग की गई।
राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री केजी अरुणराज ने सदन के पटल पर नीट विरोधी प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह मेडिकल प्रवेश की इस केंद्रीकृत व्यवस्था को तुरंत समाप्त करे।
सरकार ने अपने प्रस्ताव में नीट को खत्म करने के मुख्य कारण भी गिनाए, जिनमें परीक्षा के आयोजन में सामने आई कथित अनियमितताएं, महंगी कोचिंग सेंटरों का तेजी से बढ़ता कारोबार और सबसे दुखद, छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं शामिल थीं।
--आईएएनएस
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