प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में रक्षा और ऊर्जा सहयोग को मिला नया आयाम : एमईए
नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में कई अहम फैसले लिए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों ने बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा पर विदेश मंत्रालय की विशेष ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि आज की बैठक के मुख्य नतीजों में से एक था रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा-पत्र को अपनाना, साथ ही भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को मंजूरी देना। इससे यह साफ होता है कि बदलते रणनीतिक हालात के अनुसार, दोनों देशों की साझेदारी को आगे बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, यह रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता भी दिखाता है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने यह भी माना कि उद्योगों के बीच साझेदारी और रणनीतिक निवेश, भरोसेमंद, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा पर एक संयुक्त बयान जारी किया, जो सार्वजनिक रूप से भी उपलब्ध है। इस बयान में दोनों देशों के बीच ऊर्जा की लगातार आपूर्ति बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से भारत को कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे उत्पाद उपलब्ध कराता रहा है।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सहमति बनाई, जिससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति संभव हो सकेगी। यह व्यवस्था भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2014 में हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर आगे बढ़ने का कदम है।
यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। साथ ही, यह भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था बनाने और नेट-जीरो उत्सर्जन के साझा लक्ष्य की दिशा में भी एक अहम कदम है।
--आईएएनएस
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