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पोरबंदर: पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना 'सर्वोदय वन', गांधीजी के आदर्शों और प्रकृति का अनूठा संगम

 

पोरबंदर, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर के ओडदर में 20 करोड़ रुपए की लागत से विकसित सांस्कृतिक वन 'सर्वोदय वन' पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और गांधीजी के विचारों को एक साथ प्रस्तुत करने वाला यह वन लोगों को प्रकृति के करीब लाने के साथ-साथ बापू के आदर्शों से भी परिचित करा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 अक्टूबर 2026 को 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव के अंतर्गत इसका लोकार्पण किया था। सर्वोदय वन गुजरात का 25वां सांस्कृतिक वन है।

महात्मा गांधी के सर्वोदय के विचार पर आधारित इस वन का मुख्य उद्देश्य सत्य, अहिंसा, शांति, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता, ग्राम स्वराज और टिकाऊ जीवनशैली जैसे मूल्यों को पर्यावरण संरक्षण, मनोरंजन और जन-जागरूकता के साथ जोड़ना है। यहां बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ गांधीजी की जीवन यात्रा और पोरबंदर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी यादों को भी खूबसूरती से संजोया गया है। गांधीजी के साथ कृष्ण-सुदामा की स्मृतियों को भी इस वन में विशेष स्थान दिया गया है।

सर्वोदय वन लगभग 14 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया गया है। यहां 70 से अधिक प्रजातियों के डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। इनमें बरगद, पीपल, क्लस्टर अंजीर और बादाम जैसी देशी प्रजातियों के अलावा कैसुआरिना, पीलू, पोर्टिया और कोडिया जैसी तटीय प्रजातियां भी शामिल हैं। विभिन्न प्रकार के पौधों और हरित क्षेत्रों के माध्यम से इस वन को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण बनाने का प्रयास किया गया है। वन में महात्मा वन, सत्य और अहिंसा वन, अहिंसा स्तंभ, कृष्ण-सुदामा वाटिका, सी-व्यू गार्डन, मिशन लाइफ गार्डन, वन कवच और आयुष वन जैसे आकर्षण विकसित किए गए हैं। अलग-अलग विषयों पर आधारित ये क्षेत्र पर्यटकों को प्रकृति, संस्कृति और गांधीजी के विचारों से जुड़ने का अवसर देते हैं।

गांधीनगर के प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके सुगूर ने बताया कि सर्वोदय वन का निर्माण गांधीजी की फिलॉसफी पर आधारित है। इस वन में कुल 13 प्रमुख आकर्षण या घटक हैं। इनमें सुदामा वाटिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अलावा गांधीजी ने अहिंसा के लिए जो संघर्ष किया था, उसे भी यहां प्रदर्शित किया गया है।

पोरबंदर के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर नीलेश बेला ने बताया कि 14 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित इस वन में अलग-अलग अवधारणाओं पर आधारित कई वन बनाए गए हैं। इनमें कृष्ण-सुदामा वन, मातृवन, सत्य-अहिंसा एवं शांति वन, बड़दा वन, औषधि वन, वन कवच, मिशन लाइफ और प्लास्टिक मुक्ति पथ सहित अन्य आकर्षण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोदय वन के भीतर विभिन्न विषयों को ध्यान में रखकर अलग-अलग हिस्से विकसित किए गए हैं।

सर्वोदय वन में पर्यटकों के लिए घूमने-फिरने के साथ मनोरंजन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। यहां सौवेनियर शॉप और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा, आसपास के चिंगरिया सहित अन्य गांवों के शिल्पकारों के हस्तशिल्प प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे स्थानीय कला और शिल्प को भी मंच मिल रहा है।

पर्यटक नीलूबेन ने सर्वोदय वन की तारीफ करते हुए कहा कि यह घूमने के लिए बहुत अच्छी जगह है। उन्होंने बताया कि यहां अलग-अलग बगीचे हैं और बच्चों के लिए स्लाइड्स तथा झूले भी उपलब्ध हैं। समुद्र पास में होने के कारण पर्यटकों को समुद्र का नजारा देखने का आनंद भी मिलता है। उन्होंने लोगों से यहां आने की अपील करते हुए कहा कि यहां घूमने में बहुत आनंद आता है।

पर्यटक परेश भाई ने भी सर्वोदय वन को घूमने के लिए बेहतरीन जगह बताया। उन्होंने कहा कि यहां महात्मा गांधी के बारे में काफी कुछ जानने को मिलता है। वन में कृष्ण-सुदामा की मूर्ति भी स्थापित है, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए खेल-कूद के साधन और झूले भी उपलब्ध हैं, जिससे परिवार के साथ यहां समय बिताना अच्छा अनुभव है।

सर्वोदय वन पर्यटकों के लिए मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का स्थान होने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बन रहा है। यहां गांधीजी के आदर्शों को आधुनिक पर्यावरण संरक्षण की अवधारणाओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। स्थानीय शिल्पकारों के हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने की व्यवस्था से क्षेत्र की कला और सांस्कृतिक पहचान को भी महत्व मिला है।

--आईएएनएस

पीएसके