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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर राजस्थान की सियासत गरमाई, फुटेज में जाने डोटासरा और मदन राठौड़ के बीच तीखी बयानबाजी

 

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बीच जुबानी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। इस विवाद में भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल भी कूद पड़े हैं।

डोटासरा के बयान से बढ़ा सियासी विवाद

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विवाद की शुरुआत कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि "मदन राठौड़ पर्ची से बने हुए हैं। मेरे सामने वो क्या चीज हैं, मेरी उनसे क्या तुलना है।"डोटासरा के इस बयान के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस की अहंकारी राजनीति बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।

मदन राठौड़ का पलटवार

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने डोटासरा के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि "मैं डोटासरा की तरह बदजुबान नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।राठौड़ के बयान के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया।

बीजेपी प्रदेश प्रभारी ने भी साधा निशाना

भाजपा के राजस्थान प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने भी डोटासरा के बयान की आलोचना की। उन्होंने डोटासरा को "बेशर्म" बताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता को शोभा नहीं देती।भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए व्यक्तिगत टिप्पणी कर रही है।

बीजेपी ने सोशल मीडिया पर भी किया पलटवार

भाजपा राजस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मदन राठौड़ के हवाले से पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कहते हैं, "मदन राठौड़ क्या चीज हैं? वो तो ऊपरी पर्ची से बने हैं, मेरी बराबरी नहीं कर सकते।"पोस्ट में आगे कहा गया, "हो सकता है डोटासरा जी, आप अपने हाईकमान को धता बताकर चुनाव जीतकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने हों, लेकिन भाजपा में संगठन की अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।"

छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। अब दोनों प्रमुख दलों के प्रदेश अध्यक्षों के बीच व्यक्तिगत टिप्पणियों ने इस सियासी टकराव को और तेज कर दिया है।आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, जबकि छात्र आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी लगातार जारी है।