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पंचायत-निकाय चुनाव पर सियासी संग्राम तेज: कोर्ट फैसले के बाद विपक्ष का हमला, सरकार ने फिर OBC आयोग पर डाली जिम्मेदारी

 

राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद जहां विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की जीत बताते हुए स्वागत किया है, वहीं सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में देरी करने के आरोप भी तेज हो गए हैं।

विपक्ष का कहना है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने में गंभीरता नहीं दिखा रही है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर चुनावी प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रही है, ताकि स्थानीय निकायों में प्रशासकीय व्यवस्था को बनाए रखा जा सके।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने एक बार फिर इस मुद्दे को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट से जोड़ते हुए निर्णय को उसके पाले में डाल दिया है। सरकार का कहना है कि आरक्षण और वर्गीकरण से जुड़े सभी विवादों का निपटारा होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर समयसीमा तय होने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है, जिससे राजनीतिक असमंजस और बढ़ गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आयोग की प्रक्रिया को बहाना बनाकर चुनावों को आगे खिसकाने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनावों का इंतजार कर रही है।

सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जा सकें।

कुल मिलाकर, पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तय समयसीमा में चुनाव हो पाएंगे या मामला एक बार फिर टल जाएगा।