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पीएम-एसवाईएम योजना बनी असंगठित श्रमिकों का सहारा, नीमच में 3,300 से अधिक श्रमिक जुड़े

 

नीमच, 4 जून (आईएएनएस)। देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना लगातार लोकप्रिय होती जा रही है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नीमच जिले के हजारों श्रमिक भी उठा रहे हैं। जिले में अब तक 3300 से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है और श्रम विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर लगातार नए हितग्राहियों को योजना से जोड़ा जा रहा है।

इसी क्रम में गुरुवार को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के ग्राम नेवड़ स्थित नीमच प्रोटीन्स लिमिटेड में श्रम विभाग ने विशेष पंजीयन एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लिया और योजना की जानकारी प्राप्त कर पंजीयन कराया। श्रम विभाग के अधिकारियों ने श्रमिकों को बताया कि 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे असंगठित श्रमिक, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र श्रमिकों को उनकी आयु के अनुसार प्रतिमाह 55 रुपए से 200 रुपए तक का अंशदान करना होता है। विशेष बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके खाते में जमा करती है। 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर लाभार्थी को प्रतिमाह 3,000 रुपए की सुनिश्चित पेंशन प्रदान की जाती है, जिससे उसे बुढ़ापे में आर्थिक संबल मिलता है।

शिविर के दौरान आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर के आधार पर पात्र श्रमिकों का मौके पर ही निशुल्क पंजीयन किया गया तथा उन्हें श्रमयोगी मानधन कार्ड भी वितरित किए गए। श्रमिकों ने योजना के प्रति उत्साह दिखाते हुए इसे अपने भविष्य के लिए लाभकारी बताया।

फैक्ट्री में कार्यरत आयुष नागर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बेहद उपयोगी है। जो लोग भविष्य निधि जैसी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते, उनके लिए यह योजना एक बेहतर विकल्प है। केवल 55 से 200 रुपए तक का मासिक योगदान देकर भविष्य में 3,000 रुपए मासिक पेंशन प्राप्त करना श्रमिकों के लिए बड़ी राहत है।"

दीपेश अहीर ने भी योजना की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान में कामकाजी जीवन के बाद वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। 60 वर्ष की आयु के बाद मिलने वाली पेंशन श्रमिकों के लिए सहारा बनेगी। साथ ही ई-श्रम कार्ड के माध्यम से मिलने वाले दो लाख रुपए के दुर्घटना बीमा को भी लाभकारी बताया।

फैक्ट्री की कर्मचारी सिद्धि पराशर ने कहा कि शुरुआत में अंशदान छोटी राशि के रूप में जमा होता है, लेकिन वृद्धावस्था में यही राशि सम्मानजनक जीवन जीने का आधार बनती है। सरकार द्वारा दी जाने वाली मासिक पेंशन बुजुर्ग श्रमिकों के लिए बड़ी मदद साबित होगी।

नीमच जिला श्रम निरीक्षक सज्जन सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत जिले भर में लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। योजना में 18 से 40 वर्ष तक का कोई भी पात्र असंगठित श्रमिक पंजीयन करा सकता है। जितना अंशदान श्रमिक करेगा, उतना ही योगदान सरकार भी देगी। पंजीयन हितलाभ पोर्टल, सीएससी सेंटर तथा एमपी ऑनलाइन के माध्यम से कराया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पति या पत्नी को प्रतिमाह 1,500 रुपए की पारिवारिक पेंशन प्रदान की जाती है। जिले में योजना शुरू होने से अब तक लगभग 3,300 श्रमिकों का पंजीयन हो चुका है। श्रम विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को योजना से जोड़कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि उनका भविष्य सम्मानजनक और सुरक्षित बन सके।

--आईएएनएस

एसएके/एबीएम