PM मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से की बात, वीडियो में बोले- खुशनसीब हूं कि फिर आपके दर्शन का सौभाग्य मिला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने आधुनिक 3D तकनीक के जरिए प्रस्तुत स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बातचीत की। इस दौरान स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने 1993 में हुई पहली मुलाकात का जिक्र किया, जिस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें दोबारा स्वामीजी के दर्शन का सौभाग्य मिला।कार्यक्रम में आध्यात्मिक विरात और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से 9 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
होलोग्राम ने याद दिलाई 1993 की मुलाकात
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उनकी पहली मुलाकात फरवरी 1993 में हुई थी। उस समय मोदी उन्हें शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने पहुंचे थे।इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया, “मैं खुशनसीब हूं कि फिर मुझे आपके दर्शन का सौभाग्य मिला।”इस संवाद ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। होलोग्राम के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद की छवि और संवाद को प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों को ऐसा अनुभव हुआ मानो वे स्वयं स्वामीजी को सामने देख रहे हों।
क्या होती है होलोग्राम तकनीक?
होलोग्राम एक ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से किसी व्यक्ति या वस्तु की त्रिआयामी (3D) छवि प्रस्तुत की जा सकती है। इसे अलग-अलग कोणों से देखने पर गहराई और वास्तविकता का एहसास होता है।इस तकनीक का इस्तेमाल कार्यक्रमों, संग्रहालयों, शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र में किया जाता है। चिन्मय अमृत महोत्सव में इसका उपयोग स्वामी चिन्मयानंद की छवि के माध्यम से उनके विचारों और विरासत को लोगों के सामने प्रस्तुत करने के लिए किया गया।
23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा तीन दिवसीय महोत्सव
चिन्मय मिशन का तीन दिवसीय ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश और विदेश से 9 हजार से अधिक लोगों के भाग लेने की जानकारी दी गई है।मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर से देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का उद्देश्य स्वामी चिन्मयानंद के आध्यात्मिक विचारों और भारतीय दर्शन की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
1951 में हुई थी चिन्मय मिशन की स्थापना
चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य भगवद्गीता, वेदों और वेदांत के ज्ञान को सरल तरीके से आम लोगों तक पहुंचाना रहा है।स्वामी चिन्मयानंद ने भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया। उनके विचारों और शिक्षाओं के प्रसार के लिए चिन्मय मिशन ने देश-विदेश में कई केंद्र स्थापित किए।75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह महोव मिशन की आध्यात्मिक यात्रा, शिक्षाओं और सामाजिक योगदान को याद करने का अवसर है। भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक आध्यात्मिक विचारों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करना भी खास आकर्षण रहा।