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पीएम मोदी के आर्थिक विजन से भारत ग्लोबल पावरहाउस बनेगा : उद्योग विशेषज्ञ

 

सूरत, 15 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता, तकनीक, विनिर्माण, युवाओं और भारत की सॉफ्ट पावर से जुड़े विजन को उद्योग जगत और बाजार विशेषज्ञों ने देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसी कड़ी में 'रुपीनेक्स' के सह-संस्थापक और बिजनेस हेड अवनीश तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अवनीश तिवारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि 2014 के बाद भारत ने जिस गति से विकास किया है, आने वाले वर्षों में इसकी रफ्तार और तेज होने की संभावना है। पीएम मोदी ने जिन क्षेत्रों को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया है, उनमें एक साथ काम करने की जरूरत है। कृषि, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों में परिणाम अलग-अलग समय में दिखाई देंगे, लेकिन इन सभी क्षेत्रों का समग्र विकास भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दे सकता है।

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, डिफेंस और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की सप्लाई चेन तैयार करना कोई तत्काल प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञता, निवेश और लंबे समय तक निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। भारत में अब उद्योग जगत के अलग-अलग हिस्से एक-दूसरे से जुड़कर काम कर रहे हैं। यदि यह इंटरकनेक्टेड नेटवर्क इसी तरह मजबूत होता रहा तो भारत सेमीकंडक्टर, डिफेंस, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सामने अब केवल उत्पादन बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण भागीदार बनने की भी चुनौती है। इसके लिए देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी दक्षता और नवाचार को भी बढ़ावा देना होगा। भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में जिस तरह का बदलाव किया है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गया है। आज छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, सब्जी विक्रेताओं से लेकर आम नागरिक तक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यूपीआई को भारत की बड़ी उपलब्धियों में शामिल बताते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट ने देश में लेन-देन के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है। डिजिटल इंडिया ने केवल भुगतान की सुविधा नहीं बढ़ाई, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों और आम नागरिकों की डिजिटल भागीदारी को भी मजबूत किया है।

तिवारी ने 'मेक इन इंडिया' और स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश के युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां युवा मुख्य रूप से नौकरी की तलाश पर केंद्रित रहते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में युवा अपने बिजनेस और स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं। भारत में लगातार नए स्टार्टअप सामने आ रहे हैं और इससे देश के इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूती मिली है। भारत का लक्ष्य अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित रहना नहीं होना चाहिए। भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी कंपनियों की संख्या और प्रभाव दोनों बढ़ाने होंगे। दुनिया की फॉर्च्यून 500 कंपनियों की सूची में कम से कम 50 भारतीय कंपनियों को शामिल करने का लक्ष्य भारत के कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ा विजन है।

तिवारी ने कहा कि निजी क्षेत्र भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने एयरोस्पेस इंजनों के निर्माण को लेकर हुए करार का उदाहरण दिया। इस तरह के समझौते भारत में हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने अदाणी समूह के 'वंदे मातरम' इनिशिएटिव का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए गांव-गांव से नए विचार और प्रतिभाओं को सामने लाने की बात कही गई है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रयास भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभा और इनोवेशन को राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के जरिए भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति को दुनिया के अनेक देशों में पहचान मिली है। आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसे स्वास्थ्य और जीवनशैली से जोड़कर अपनाया जा रहा है। योग और आयुर्वेद अब केवल स्वास्थ्य जागरूकता के विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि इनके आसपास एक बड़ा सर्विस सेक्टर विकसित हो रहा है। इससे प्रशिक्षकों, वेलनेस सेंटर, पर्यटन, हेल्थ सर्विसेज और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें भारत के भविष्य को केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कृषि से लेकर तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिजिटल इकोनॉमी और योग से लेकर सॉफ्ट पावर तक एक व्यापक विजन सामने रखा गया। भारत को ग्लोबल पावरहाउस बनाने के लिए सरकार, उद्योग, स्टार्टअप, युवाओं और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम