पीएम मोदी भारत के भाग्य विधाता, यह नाम देने में मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं: वैंकेया नायडू
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। भारत के पूर्व राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक कार्यकाल और पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड तोड़ने पर एक लेख लिखा है। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि नरेंद्र मोदी की कहानी एक अनोखी दास्तान है।
वैंकेया नायडू ने लिखा, "आजाद भारत ने जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक 15 प्रधानमंत्री देखे हैं। उन्होंने अलग-अलग सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक हालात में देश की सेवा की और अपनी पूरी क्षमता से कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। मौजूदा प्रधानमंत्री की कहानी एक अनोखी दास्तान है।
नरेंद्र मोदी नेहरू का रिकॉर्ड तोड़कर सबसे लंबे समय तक लगातार (4,399 दिन) पद पर रहने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनके कार्यकाल में अभी तीन साल और बाकी हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि यह ऐसे दौर में मिली है जब जबरदस्त राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, गठबंधन की राजनीति, 24 घंटे मीडिया की नजर और सोशल मीडिया से चलने वाली जन-चर्चा का माहौल है। साधारण परिवार में जन्मे मोदी ने गुजरात के वडनगर में चाय बेचने का काम किया और अपने पिता का हाथ बंटाया। वहां से निकलकर देश की राजधानी के साउथ ब्लॉक में प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचना एक असाधारण उपलब्धि है।"
पूर्व राष्ट्रपति ने लिखा, "उनकी (पीएम मोदी) यात्रा आत्म-साक्षात्कार की थी। भारत, जनता और उनकी समस्याओं को समझने की, देश के भविष्य को "स्वर्ण भारत" के रूप में परिकल्पित करने की और इस दृष्टि को साकार करने के लिए प्रयासरत रहने की। उनके मन पर प्रारंभिक रूप से आरएसएस के साथ उनके जुड़ाव का गहरा प्रभाव पड़ा। अपने जीवन के अधिकांश समय उन्होंने चुपचाप आरएसएस, जनसंघ और भाजपा द्वारा विभिन्न स्तरों पर सौंपे गए कर्तव्यों का निर्वहन किया। इस प्रक्रिया में उन्होंने अपार संगठनात्मक क्षमता, स्पष्ट विचार, भारत के भविष्य के सपने देखने का साहस और कर्तव्य की पुकार आने पर उसका सामना करने की क्षमता प्राप्त की।"
वैंकेया नायडू ने कहा, "51 वर्ष की आयु में मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने पहले दिन से ही अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया, गुजरात की जनता की उद्यमशीलता और ऊर्जा को उजागर और निर्देशित किया। मुख्यमंत्री के रूप में उनका 13 वर्ष का निर्बाध कार्यकाल कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उनके कार्यकाल के दौरान उभरे गुजरात मॉडल ने देश की जनता की कल्पना को साकार किया। भारत की जनता एक ऐसे नेता की तलाश में थी जो परिणाम दे सके। उन्हें मोदी में ऐसा नेता मिला। मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को जीत दिलाई। पहली बार भाजपा ने बहुमत हासिल किया। जामग्लेड भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में से एक थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के लिए जोरदार समर्थन किया था। मोदी ने इस शानदार प्रदर्शन को दोहराया।"
पूर्व राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 12 वर्षों में किए गए कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "12 करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालय बनाकर 'स्वच्छ भारत' को एक जन-आंदोलन बनाया, गरीबों के लिए 4 करोड़ से ज़्यादा घर बनाए गए, 57 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए, डीबीटी के जरिए लाभार्थियों को 45 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए, रसोई में धुआं झेलने वाली 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यूपीआआई के जरिए 24,000 करोड़ से ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन ने हमारे देश को रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में ग्लोबल लीडर बना दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को भोजन की मदद मिली और यह मदद अभीजारी है। 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' मोदी की सोच है।"
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि पीएम मोदी ने शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर विस्तार करके मानव संसाधन विकास की पहल की। देशभर में आईआईटी, आईआईएम और एस्म की संख्या कई गुना बढ़ गई है। आयुष्मान भारत दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी फंड वाला स्वास्थ्य कार्यक्रम है। पीएम मोदी पुरानी सोच या ढर्रे पर चलने में विश्वास नहीं रखते। तुष्टीकरण सही विकल्प नहीं है। अनुच्छेद 370 को हटाना, तीन तलाक को खत्म करना, भारी विरोध के बावजूद जीएसटी सुधार लागू करना और संसद व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण इसके स्पष्ट उदाहरण हैं। मोदी ने आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरी छाप छोड़ी है। वामपंथी उग्रवाद लगभग खत्म हो चुका है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी तरफ बुरी नज़र रखने वालों को कड़ा सबक सिखाया। हमारी विदेश नीति भी ऐसी ही है। पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होगी, न कि किसी खास देश के। अब दुनियाभर में होने वाली बातचीत में भारत की आवाज मायने रखती है।
भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, "इन 12 साल के बाद मुझे पीएम मोदी को 'मैन ऑफ डेस्टिनी फॉर इंडिया' (भारत का भाग्य विधाता) का नया नाम देने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। वह भाग्य है- स्वर्णिम भारत। भारत उनके हाथों में सुरक्षित है। मैं नरेंद्र मोदी को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।"
--आईएएनएस
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