☰
×

पितृपक्ष में मोक्षदायी नासिक और पंढरपुर, गोदावरी और चंद्रभागा तट पर पितरों को मिलती है शांति

 

नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए देशभर में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। महाराष्ट्र के नासिक और पंढरपुर को भी पितृकर्म के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। नासिक में गोदावरी नदी के तट और पंढरपुर में चंद्रभागा नदी के किनारे श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त स्नान, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

नासिक में बहने वाली गोदावरी को 'दक्षिण गंगा' के नाम से भी जाना जाता है। पितृपक्ष के दौरान गोदावरी के तट पर पितरों की संतुष्टि के लिए स्नान, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों को शांति और तृप्ति मिलती है तथा परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।

नासिक के पंचवटी क्षेत्र और गोदावरी तट स्थित रामकुंड को पितृ तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां श्रद्धालु स्नान करने के बाद अपने पितरों के नाम-गोत्र से तर्पण करते हैं और पिंडदान व श्राद्ध कर्म करते हैं। पितृपक्ष के दौरान इन स्थानों पर देशभर से श्रद्धालुओं के पहुंचने की मान्यता है।

नासिक के पास स्थित त्र्यंबकेश्वर को भी पितृकर्म के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। यह क्षेत्र गोदावरी के उद्गम स्थल के रूप में धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण नागबली जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की परंपरा है।

मान्यता है कि त्रिपिंडी श्राद्ध और पिंडदान से अतृप्त पितरों को तृप्ति और मुक्ति मिलती है। कुशावर्त कुंड को भी पितृ तर्पण के महत्वपूर्ण स्थलों में माना गया है। पितृपक्ष में श्रद्धालु स्नान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर अपने पूर्वजों की शांति की कामना करते हैं।

गोदावरी के तट पर पितृ कर्म के दौरान श्रद्धालु पितरों के नाम-गोत्र से तर्पण के साथ ब्राह्मण भोजन और दान भी करते हैं। इन कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद मिलता है।

इसी तरह, महाराष्ट्र का पंढरपुर भगवान श्री विट्ठल और माता रुक्मिणी के प्रसिद्ध धाम के रूप में जाना जाता है। यहां से होकर बहने वाली भीमा नदी अपने अर्धचंद्राकार प्रवाह के कारण 'चंद्रभागा' के नाम से भी जानी जाती है। चंद्रभागा नदी का तट पितृकर्म के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु चंद्रभागा नदी के घाट पर स्नान कर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं। कहा जाता है कि यहां स्नान और विधि-विधान से किए गए पितृकर्म से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

पंढरपुर में चंद्रभागा नदी के बीच स्थित विष्णुपद मंदिर भी पितृकर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां भगवान विष्णु के चरणों के निशान होने की मान्यता है। यहां श्रद्धालु पितरों के मोक्ष और शांति की कामना से पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम