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पिछला सप्ताह कैसा रहा? भारत की कूटनीति में द्विपक्षीय रिश्तों से लेकर वैश्विक मंचों तक हलचल

 

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। अक्टूबर का आखिरी सप्ताह भारत की विदेश नीति के लिहाज से काफी व्यस्त, सफल और महत्वपूर्ण रहा। 25 से 31 अक्टूबर के बीच भारत ने यूरोप, पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। इस दौरान कई उच्चस्तरीय यात्राएं, द्विपक्षीय वार्ताएं और बहुपक्षीय बैठकें हुईं।

सप्ताह की खास बात यह रही कि भारत ने एक तरफ यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाया, तो दूसरी तरफ अमेरिका और कनाडा के साथ संबंधों में निरंतर संवाद बनाए रखे। सप्ताह के आखिरी दो दिनों में अटलांटा में हुई जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक ने इन कूटनीतिक प्रयासों को एक व्यापक वैश्विक संदर्भ दिया।

30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय आयोजन रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसमें भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक संघर्षों, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दे उठाए।

जयशंकर ने स्पष्ट संदेश दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्धों का असर केवल संघर्षरत देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से पूरी दुनिया, खासकर ग्लोबल साउथ, प्रभावित होता है।

इस दौरान जयशंकर ने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय पर चर्चा हुई। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसके जरिए प्रस्तावित क्वाड नेताओं के अगले शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि तैयार करने का अवसर मिला।

अटलांटा पहुंचने से पहले जयशंकर की कूटनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत के प्रमुख साझेदारों के साथ संपर्क बनाए रखना रहा। 30 अक्टूबर को उन्होंने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास से मुलाकात की। बातचीत में यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई।

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और अनीता आनंद के साथ भी बातचीत की। इसमें ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी (एसीआईटीआई) पर विशेष ध्यान रहा।

इसके अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के साथ भी उनकी मुलाकातें हुईं। अर्जेंटीना के साथ व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा और परमाणु सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई, जबकि मैक्सिको के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर रहा।

लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस अपनी पत्नी राजकुमारी सोफी की 25 से 28 अक्टूबर 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा भी कूटनीतिक लिहाज से अहम रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और भारत-ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ) समझौते के तहत आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

सप्ताह के व्यापक कूटनीतिक संदर्भ में ऑस्ट्रिया और खाड़ी देशों के साथ भारत के बढ़ते संपर्क भी महत्वपूर्ण रहे। ऑस्ट्रिया की विदेश मंत्री बीट माइनल-राइजिंगर की भारत यात्रा के दौरान जयशंकर के साथ वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी और यूरोपीय सहयोग के मुद्दे उठे।

25 से 31 अक्टूबर के सप्ताह का आकलन करें तो भारत की कूटनीति में तीन प्रमुख प्राथमिकताएं साफ दिखाई देती हैं।

पहली, अमेरिका, यूरोप और हिंद-प्रशांत के प्रमुख साझेदारों के साथ रणनीतिक संवाद बनाए रखना। दूसरी, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्र में नए सहयोग के अवसर तलाशना। तीसरी, रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया जैसे संघर्षों के बीच कूटनीतिक समाधान और वैश्विक आर्थिक स्थिरता की पैरवी करना।

--आईएएनएस

केआर/