पटियाला लाठीचार्ज मामले पर मानवाधिकार आयोग सख्त, 10 दिनों में प्रशासन से रिपोर्ट तलब
चंडीगढ़, 8 जून (आईएएनएस)। पंजाब और चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के सदस्य और पद्मश्री से सम्मानित जितेंद्र सिंह शंटी ने पटियाला में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा था तो उस पर बल प्रयोग के औचित्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसको लेकर पटियाला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
दरअसल, अत्यधिक गर्मी के बीच पटियाला में बिजली कर्मियों और अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा धरना दिया जा रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, पर बल प्रयोग के दृश्य सामने आए, जिसके बाद इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है।
जितेंद्र सिंह शंटी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास निश्चित प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें पहले नोटिस देना, फिर चेतावनी बोर्ड लगाना, इसके बाद आवश्यक होने पर आंसू गैस का प्रयोग, पानी की बौछार और अंतिम चरण में लाठीचार्ज शामिल होता है। उनके अनुसार, यदि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने एक औपचारिक प्रक्रिया शुरू की है। जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि उन्होंने आयोग के सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह के साथ मिलकर इस घटना पर संज्ञान लिया है और पटियाला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों का क्या दोष था, कितने लोग घायल हुए, कितनों को मेडिकल सहायता या अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, और क्या मौके पर महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होती या तथ्य छुपाए जाते हैं, तो आयोग आगे की कार्रवाई के लिए डीजीपी को पत्र लिख सकता है और उच्च स्तर पर मामले को ले जाया जाएगा। उनका कहना है कि अभी तक जो जानकारी मिली है, वह मुख्यतः मीडिया और सोशल मीडिया वीडियो पर आधारित है, क्योंकि आयोग को सीधे तौर पर कोई औपचारिक शिकायत या ठोस प्रमाण अभी तक नहीं मिले हैं, इसलिए आगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का हक है, जैसा कि भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित मूल अधिकारों में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है।यदि प्रदर्शनकारी अपने हक की मांग कर रहे थे और शांतिपूर्ण थे तो उनके साथ न्याय होना चाहिए।
--आईएएनएस
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