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पश्चिम बंगाल: सिलीगुड़ी सीट पर भाजपा की प्रचंड जीत, 73 हजार से ज्यादा वोटों से टीएमसी की हार

 

कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा की चर्चित सीटों में से एक सिलीगुड़ी का परिणाम सामने आ गया है। इस सीट से भाजपा के शंकर घोष ने 73 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

शंकर घोष के पक्ष में 1,20,760 वोट मिले। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी टीएमसी के गौतम देब को 47,568 वोट मिले। इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सरदिन्दु चक्रवर्ती (जॉय) तीसरे नंबर पर रहे।

राजनीतिक रूप से सिलीगुड़ी सीट का इतिहास काफी विविध रहा है। यहां अलग-अलग समय पर कांग्रेस, वामपंथी दल, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा सभी ने जीत दर्ज की है। सीपीआई(एम) ने यहां सबसे ज्यादा आठ बार जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की। 2011 के बाद से यहां हर चुनाव में अलग-अलग पार्टी की जीत ने इसे एक प्रतिस्पर्धी सीट बना दिया है।

2011 में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत हासिल की, जबकि 2016 में वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने वापसी की। इसके बाद 2021 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार यहां से जीत दर्ज की। इस तरह सिलीगुड़ी की राजनीति लगातार बदलते समीकरणों का उदाहरण रही है।

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित सिलीगुड़ी, कोलकाता और आसनसोल के बाद राज्य का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र माना जाता है। जलपाईगुड़ी के साथ यह 'ट्विन सिटी' का रूप लेता है और दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस विधानसभा क्षेत्र में सिलीगुड़ी नगर निगम के 33 वार्ड शामिल हैं और यह पूरी तरह शहरी सीट है। पूर्वी हिमालय की तलहटी और महानंदा नदी के किनारे बसा सिलीगुड़ी 'नॉर्थ-ईस्ट का गेटवे' कहलाता है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के पास स्थित होने के कारण इस शहर की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत बेहद खास है।

डेमोग्राफिक दृष्टि से यह सीट पूरी तरह शहरी है, जहां 2024 में करीब 2.39 लाख मतदाता थे। अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 8.84 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 1.26 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता करीब 6.20 प्रतिशत हैं। यहां वोटिंग प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से अच्छा रहा है, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।

भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र संवेदनशील भी है। सिलीगुड़ी हाई-रिस्क सिस्मिक जोन 4 में आता है, जिससे यहां भूकंप का खतरा बना रहता है। 2011 के भूकंप समेत कई झटकों ने इसकी संवेदनशीलता को उजागर किया है। साथ ही महानंदा और तीस्ता नदियों के कारण मानसून में बाढ़ का खतरा भी बना रहता है।

आर्थिक रूप से सिलीगुड़ी चार प्रमुख क्षेत्रों, चाय, लकड़ी, पर्यटन और परिवहन, पर आधारित है। यह उत्तर-पूर्व और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा व्यापारिक और वितरण केंद्र है। कनेक्टिविटी के लिहाज से भी सिलीगुड़ी एक प्रमुख हब है, जो दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। साथ ही नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के पास होने के कारण इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व भी बढ़ जाता है।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी